यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए भारत के पास रूस पर दबाव बनाने की क्षमता है : एस्टोनिया
नरेश
- 20 May 2026, 04:30 PM
- Updated: 04:30 PM
(आसिम कमाल)
तल्लिन, 20 मई (भाषा) एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस साकना ने कहा है कि भारत के पास यूक्रेन संघर्ष को समाप्त कराने के लिए रूस पर दबाव बनाने की क्षमता है और शांति लाने के प्रयासों में नयी दिल्ली एक ''बड़ी भूमिका'' निभा सकता है। लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि अंततः रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ''अत्याचार'' रोकना होगा।
साकना ने यह भी कहा कि एस्टोनिया 2027 में यूक्रेन पुनर्निर्माण सम्मेलन का आयोजन करने वाला है और उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत भी युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण में भागीदार बन सकता है।
क्षेत्र में शांति लाने में भारत की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर, मंत्री ने कहा कि रूस चार वर्षों से अधिक समय से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए है। उन्होंने कहा कि ''संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूस पर अधिक दबाव डालने या उससे बातचीत करने के मामले में भारत के पास क्षमता है।''
उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में कहा, ''लेकिन सच कहूं तो, इस युद्ध को अभी समाप्त करने वाले एकमात्र व्यक्ति राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ही हैं। यूरोप और एस्टोनिया के लिए रूस एक सीधा खतरा है। हम यूरोप में कोई युद्ध नहीं चाहते, लेकिन दुर्भाग्य से, हमें (युद्ध) का सामना करना पड़ रहा है।''
साकना ने कहा कि रूस पर अपना रुख और लक्ष्य बदलने के लिए किसी भी तरह का दबाव स्वागत योग्य होगा, क्योंकि यूक्रेन और यूरोप शांति चाहते हैं।
यूक्रेन पुनर्निर्माण सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस आयोजन में विश्व के नेता, दानदाता और निजी कंपनियां एक साथ आएंगी।
यह दावा करते हुए कि यूक्रेन का पुनर्निर्माण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 'मार्शल योजना' के बाद यूरोप की सबसे बड़ी परियोजना होगी, उन्होंने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि भारत भी इसमें शामिल होगा।''
मार्शल योजना एक अमेरिकी पहल थी जिसे 1948 में पश्चिमी यूरोप को विदेशी सहायता प्रदान करने के लिए लागू किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, अमेरिका ने यूरोप के आर्थिक पुनरुद्धार कार्यक्रमों के तहत 17 यूरोपीय देशों को 13.3 अरब अमेरिकी डॉलर हस्तांतरित किए थे।
एस्टोनिया आये भारतीय पत्रकारों के एक समूह से बात करते हुए साकना ने दावा किया कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस की स्थिति ''अस्थिर'' है और मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई है।
उन्होंने कहा, ''हमारे लिए रूस मुख्य सुरक्षा खतरा था, है और रहेगा, क्योंकि हम जानते हैं कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2008 में जॉर्जिया के खिलाफ यूरोप में युद्ध शुरू किया था तथा पश्चिमी दुनिया और वैश्विक स्तर पर इसकी प्रतिक्रिया बहुत कमजोर थी, इसलिए जॉर्जिया का 20 प्रतिशत हिस्सा अभी भी कब्जे में है।''
मंत्री ने कहा, ''पुतिन ने 2014 में अगले देश - यूक्रेन - पर हमला किया।''
उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रामकता 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के साथ शुरू हुई थी, न कि 2022 में जैसा कि व्यापक रूप से माना जाता है।
उन्होंने कहा, ''हम सभी प्रभावित हैं... हम जानते हैं कि रूस से कैसे बात करनी है, हम जानते हैं कि हमें स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि लक्ष्मण रेखा कहां हैं और क्या गलतियां हो सकती हैं।''
साकना ने स्वीकार किया कि भारत के दृष्टिकोण से स्थिति अलग हो सकती है क्योंकि भारत के रूस के साथ ऐतिहासिक रूप से अलग संबंध रहे हैं, और साथ ही यह एक बड़ा देश है जिसके हित भी अलग हैं।
एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोप अब रूस को ''सैन्य और राजनीतिक खतरे'' के रूप में देखता है।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश
2005 1630 तल्लिन