अंकिता हत्याकांड मामले में विश्वसनीय साक्ष्य पेश किए जाएं तो किसी भी जांच को तैयार: उत्तराखंड सरकार
धीरज
- 02 Jan 2026, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
देहरादून, दो जनवरी (भाषा) उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के संबंध में हाल में हुए नए खुलासों के बाद विपक्षी कांग्रेस द्वारा मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग के बीच राज्य सरकार ने शुक्रवार को कहा कि अगर विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं तो सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार है।
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में सोशल मीडिया पर आरोप लगाने वाले व्यक्तियों से भी सामने आकर सबूत पेश करने को कहा और भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी।
उनियाल ने मामले में राजनीतिक षडयंत्र की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि दोषियों को उम्र कैद की सजा मिलने के बाद मामला अपील के स्तर पर है और इस तरह के ऑडियो-वीडियो खुलासे दोषियों को लाभ पहुंचाने की साजिश का हिस्सा भी हो सकते हैं।
कांग्रेस की सीबीआई जांच की मांग के बारे में उनियाल ने कहा,‘‘पुख्ता सबूत सामने आने पर सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार है, लेकिन उससे पहले इस तरह का निर्णय सजायाफ्ताओं को फायदा पहुंचा सकता है।’’
वर्ष 2022 में हुए हत्याकांड का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रदेश की बेटी के साथ हुई इस जघन्य घटना को संवेदनशीलता और गंभीरता से लेते हुए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने तत्काल महिला पुलिस उप महानिरीक्षक के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जिसके द्वारा की गयी प्रभावी जांच और न्यायालय में सरकार की मजबूत पैरवी के कारण दोषियों को उम्रकैद की सजा दिलायी गयी।
एक सवाल के जवाब में उनियाल ने कहा कि प्रकरण की विवेचना के दौरान जब एक पक्ष सीबीआई जांच की संस्तुति के लिए न्यायालय पहुंचा था तो सुनवाई अदालत, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने भी एसआईटी की जांच को सही और सक्षम मानते हुए किसी अन्य जांच से इनकार कर दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘ तीनो न्यायालयो ने माना कि किसी भी वीआईपी को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है और विवेचना में कोई वीआईपी पाया भी नहीं गया।’’
उनियाल ने इस संबंध में राजनीतिक षडयंत्र की ओर इशारा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो-वीडियो में की गयी बयानबाजी दोषियों की जमानत का रास्ता भी खोल सकती है।
उन्होंने कहा कि वीडियो-ऑडियो की रिकार्डिंग में तिथि भी स्प्ष्ट नहीं है और रिकार्डिंग में बिना किसी साक्ष्य के एक-दो लोगों का नाम बार-बार लिया जाना उन्हें व्यक्तिगत क्षति पंहुचाने का आशय भी प्रतीत होता है।
हरिद्वार जिले के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली महिला उर्मिला सनावर ने हाल में अपने वीडियो और राठौर से अपनी कथित बातचीत के ऑडियो जारी कर आरोप लगाया है कि अंकिता हत्याकांड में ‘वीआईपी’ कथित रूप से ‘गटटू’ नाम का व्यक्ति है। एक अन्य वीडियो में महिला ने गटटू की पहचान भाजपा महासचिव और उत्तराखंड के पार्टी मामलों के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम के रूप में की है। इस दावे के बाद प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। इस कथित खुलासे के बाद कांग्रेस पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराए जाने की मांग कर रही है।
भाषा दीप्ति