सीईसी सदस्य ने ईएसजेड में कटौती के खिलाफ याचिका को लेकर बैनरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान का दौरा किया
अमित सुरेश
- 02 Jan 2026, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
बेंगलुरु, दो जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के एक सदस्य ने शुक्रवार को बैनरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान का दौरा किया। यह दौरा संरक्षित क्षेत्र के आसपास के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) में कटौती को चुनौती देने वाली एक याचिका के संबंध में किया गया।
सीईसी सदस्य चंद्र प्रकाश गोयल ने पार्क का दौरा किया और संशोधित ईएसजेड अधिसूचना के संभावित पारिस्थितिक प्रभाव का आकलन करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं।
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गोयल ने उद्यान का दौरा किया, संबंधित पक्षों की चिंताओं को सुना। उन्होंने बताया कि संबंधित पक्षों ने गोयल के समक्ष प्रस्तुतियां भी दीं।
के. बेलियप्पा और अन्य द्वारा मई 2025 में दायर याचिका में यह दलील दी गई थी कि ईएसजेड को कम करने वाली अधिसूचना ने स्थापित हाथी गलियारों के आसपास के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर कर दिया, जिससे वन्यजीव संरक्षण कमजोर हो गया।
इसमें यह भी दलील दी गई है कि बैनरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान के लिए एक समान एक किलोमीटर के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) मानदंड को लागू करने में स्थल-विशिष्ट पारिस्थितिक आवश्यकताओं को ध्यान में नहीं रखा गया।
सीईसी सदस्य गोयल ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक के लिए, विशेष रूप से बेंगलुरु के संदर्भ में, बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शहर के एक तरफ स्थित है। उन्होंने कहा कि सभी राष्ट्रीय उद्यानों की तरह, इसमें एक पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) भी है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2016 में जारी ईएसजेड अधिसूचनाओं और 2020 में प्रकाशित अंतिम अधिसूचना के बीच भिन्नताओं को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में दलील दी गई है कि 2020 की अधिसूचना में ईएसजेड क्षेत्र में की गई कमी वन्यजीवों, विशेष रूप से हाथियों के लिए हानिकारक है और इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।’’
उनके अनुसार, इस मामले को अब केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) को सौंप दिया गया है, जिसके वे सदस्य हैं, ताकि वह उच्चतम न्यायालय को एक रिपोर्ट प्रस्तुत कर सके।
उन्होंने वर्ष 2016 और 2020 की अधिसूचनाओं के बीच अंतर के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘मेरा यह दौरा मुख्य रूप से संबंधित रिपोर्ट को अंतिम रूप देने और प्रस्तुत करने से पहले डेटा और आंकड़े संकलित करने के लिए है।"
उन्होंने कहा, “मुख्य अंतर यह है कि बफर जोन की चौड़ाई 4.5 किलोमीटर से घटाकर एक किलोमीटर कर दी गई है, यहां तक कि कुछ हिस्सों में राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से 100 मीटर की दूरी तक भी, इसे कम कर दिया गया है।”
उन्होंने कहा, “पहले की अधिसूचना में लगभग 290 वर्ग किलोमीटर के ईएसजेड को शामिल किया गया था, जबकि संशोधित अधिसूचना में लगभग 168 वर्ग किलोमीटर को शामिल किया गया है। यही मुख्य अंतर है।”
इस आरोप का जवाब देते हुए कि ईएसजेड में कमी से कई रिसॉर्ट और आवास परियोजनाओं के निर्माण में मदद मिली है, जिनमें कर्नाटक आवास विकास बोर्ड द्वारा विकसित सरकारी आवास परियोजनाएं भी शामिल हैं, उन्होंने कहा कि इन दावों का जिक्र ब्रीफिंग में किया गया था। उन्होंने कहा कि हालांकि, यह जांच करना महत्वपूर्ण होगा कि ये विकास 2020 की अधिसूचना से पहले हुए थे या बाद में, क्योंकि इससे मामले का स्वरूप बदल जाएगा।
भाषा अमित