तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार को बताया ''ग्रेड डी'' सरकार
माधव
- 02 Feb 2026, 05:37 PM
- Updated: 05:37 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि वह ''ग्रेड डी'' सरकार है जो जमीनी वास्तविकताओं से दूर है और लोगों से किए गए उसके विभिन्न वादे भी अधूरे हैं।
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश किए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सदस्य सागरिका घोष ने दावा किया कि सरकार जमीनी चुनौतियों से दूर है और अपनी असफलता को लेकर आत्मचिंतन भी नहीं करती।
उन्होंने कहा कि देश के लोगों को मतदान का अधिकार है लेकिन मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों से मतदान करने का अधिकार छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि नामों में मामूली विसंगति होने पर भी आपत्ति जतायी जा रही है और अमर्त्य सेन सहित कई मशहूर लोगों को एसआईआर के नाम पर समन किया गया।
तृणमूल सदस्य ने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण में भ्रष्टाचार मुक्त तंत्र की बात की गयी है लेकिन सचाई कुछ और ही है। उन्होंने कहा कि कैग की रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ है कि जीएसटी सहित कई क्षेत्रों में भारी अनियमितताएं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित कई राज्यों में भी घोटाले हुए हैं। लेकिन ''मीडिया और प्रेस पर कब्जा कर लिया है।''
उन्होंने भारतीय न्याय संहिता पर भी निशाना साधा और कहा कि पत्रकारों, स्टैंड-अप कॉमेडियन, कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने (ईडी) प्रवर्तन निदेशालय को ''भाजपा का चुनाव विभाग'' करार देते हुए आरोप लगाया कि वह भाजपा नेताओं को छूती भी नहीं है जबकि विपक्ष को परेशान करती है। उन्होंने तंज किया कि भाजपा में शामिल होते ही दागदार नेता भी स्वच्छ हो जाते हैं।
घोष ने मनरेगा के नाम पर नया कानून लाए जाने का विरोध करते हुए कहा कि मनरेगा योजना ग्रामीण जीवन की जीवनरेखा थी जबकि नया कानून भ्रम है।
उन्होंने कहा कि अभिभाषण में वायु प्रदूषण का कोई जिक्र नहीं है जबकि यह मौजूदा दौर में एक गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि वायु प्रदूषण के कारण भारी नुकसान होता है और इससे लोगों की मौत भी हो जाती है।
घोष ने कहा कि सरकार ''सबका साथ सबका विकास'' की बात करती है लेकिन वह रणनीति के तहत विभाजनकारी गतिविधियों में शामिल है और देश में धर्म के नाम पर भेदभाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में नफरती भाषणों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन तीन ऐसे भाषण दिए जा रहे हैं।
भाषा अविनाश माधव
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