यूक्रेन-रूस संघर्ष को सुलझाने में ‘बड़ी भूमिका’ निभा सकता है भारत: अमेरिकी राजदूत गार्सेटी
अमित संतोष
- 19 Jul 2024, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
कोलकाता, 19 जुलाई (भाषा) भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने शुक्रवार को कहा कि रूस और यूक्रेन के साथ मजबूत संबंध रखने वाला भारत दोनों देशों के बीच संघर्ष को सुलझाने में एक ‘‘बड़ी भूमिका’’ निभा सकता है।
गार्सेटी ने कहा कि ‘‘इस मामले पर निर्णय लेना विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र पर निर्भर करता है।’’
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की बढ़ती भूमिका का स्वागत करते हुए और भारतीय महासागर में समुद्री डाकुओं द्वारा अपहृत मालवाहक जहाजों को छुड़ाने के लिए भारतीय नौसेना की साहसिक कार्रवाई की सराहना करते हुए अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के सशक्तिकरण में भी बहुत अच्छा काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम विश्व में किसी भी युद्ध के बेहतर समाधान के लिए भारत द्वारा निभायी जाने वाली किसी भी भूमिका का स्वागत करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत के यूक्रेन और रूस दोनों के साथ अतीत में अविश्वसनीय रूप से मजबूत संबंध रहे हैं और इसलिए वह (भारत) एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।"
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय भारत को लेना है। उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी भी देश का स्वागत करते हैं जो किसी अन्य देश की सीमाओं की संप्रभुता में बाधा डालने वाले और निर्दोष नागरिकों को बहुत पीड़ा पहुंचाने वाले अनुचित आक्रमण के खिलाफ खड़ा होता है।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ और नौ जुलाई को रूस की यात्रा की थी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक की थी।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि रूस के साथ भारत के संबंधों के बारे में अपनी चिंताओं को लेकर अमेरिका काफी स्पष्ट रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी कहा था कि वाशिंगटन "भारत से यूक्रेन में एक स्थायी और न्यायपूर्ण शांति को साकार करने के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह करता है।’’
कोलकाता में एक शिक्षा बैठक के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए, गार्सेटी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सबसे बुनियादी सिद्धांत सीमाओं की संप्रभुता है। उन्होंने कहा, "हमने सीमा के मसले पर भारत का समर्थन किया है और सामन कारण से यूक्रेनी लोगों के खिलाफ इस अकारण युद्ध में हमने इतना मजबूत रुख अपनाया है।’’
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि पिछली बार जब उन्होंने पिछले साल जुलाई में भारत के पूर्वोत्तर पर बात की थी, तो उनकी बात को गलत समझा गया था, जहां मणिपुर में अशांति देखी जा रही है।
गार्सेटी ने कहा, "मैंने सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि मनुष्य के रूप में, जब हम कहीं भी पीड़ा देखते हैं, चाहे वह अमेरिका में हो, भारत में हो या किसी तीसरे देश में, जब भी हम मानवीय पीड़ा देखते हैं, तो हमें पीड़ा होती है।"
उन्होंने दोहराया कि यह भारत का मुद्दा है जिसे भारत और भारतीयों को सुलझाना है, न कि अमेरिका को। उन्होंने कहा, "हम पूर्वोत्तर से प्यार करते हैं और अगर भारत सरकार स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, युवा सशक्तिकरण के मामले में हमसे मदद मांगती है, तो हम पूर्वोत्तर में किसी भी (इनमें से किसी भी मुद्दे) पर सहायता करने के लिए तैयार हैं।"
भाषा अमित