नारायण साईं की आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने से न्यायालय का इनकार
सुरेश
- 07 Aug 2026, 02:49 PM
- Updated: 02:49 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कथावाचक आसाराम के बेटे नारायण साईं को 2013 के दुष्कर्म मामले में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने हालांकि गुजरात उच्च न्यायालय से कहा कि वह दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ साईं की अपील पर तीन महीने के भीतर फैसला करे।
पीठ ने कहा, ''हम उच्च न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि वह तीन महीने की अवधि के भीतर अपील का निपटारा करने का प्रयास करे। हम यह स्पष्ट करते हैं कि याचिकाकर्ता और राज्य, दोनों इसमें सहयोग करेंगे।''
साईं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि अपील के शीघ्र निपटारे की अर्जी के बावजूद उसपर सुनवाई नहीं हुई है।
शीर्ष अदालत ने साईं को यह छूट दी कि यदि उसकी याचिका पर तीन महीने के भीतर फैसला नहीं होता है तो वह फिर उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकता है।
सूरत की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के खिलाफ साईं की अपील गुजरात उच्च न्यायालय में लंबित है।
उच्च न्यायालय ने चार मई के अपने आदेश में साईं की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचना ''हमारे लिए कठिन है कि अपीलकर्ता-दोषी के अपीलीय अदालत से बरी होने की पर्याप्त संभावना है''।
उच्च न्यायालय ने कहा था, ''इस प्रकार, मामले के गुण-दोष के आधार पर हमें सजा निलंबित करने और जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिलता।''
उच्च न्यायालय ने कहा था कि हालांकि साईं 11 साल जेल की सजा काट चुका है, लेकिन उसने 2019 से अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील की अंतिम सुनवाई में सहयोग नहीं किया है। उसने कई बार याचिका दायर कर अस्थायी या स्थायी जमानत पाने की कोशिश की है।
पीठ ने कहा था कि उसे अपनी अपील की शीघ्र सुनवाई में दिलचस्पी नहीं थी और उसने कार्यवाही में देरी के लिए कई हथकंडे अपनाए।
सूरत की एक अदालत ने साईं को उसकी एक पूर्व महिला अनुयायी द्वारा 2013 में दर्ज कराए गए दुष्कर्म के मामले में अप्रैल 2019 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 323 (मारपीट), 506(2) (आपराधिक धमकी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया था।
इसके अलावा उसके सहयोगियों - धर्मिष्ठा उर्फ गंगा, भावना उर्फ जमुना और पवन उर्फ हनुमान - को 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी।
साईं के पिता आसाराम को दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है।
भाषा
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