बसवराज होरट्टी कर्नाटक विधानपरिषद के सभापति पद से देंगे इस्तीफा
नरेश
- 06 Aug 2026, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
बेंगलुरु, छह अगस्त (भाषा) कर्नाटक विधानपरिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनके पद नहीं छोड़ने की स्थिति में सत्तारूढ़ कांग्रेस उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला कर चुकी है इसलिए वह अपने पद से त्यागपत्र दे देंगे।
होरट्टी ने बुधवार देर रात मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की थी और उन्हें हटाए जाने के कदम पर चर्चा की थी।
आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधानपरिषद सदस्य बी.के. हरिप्रसाद ने भी उनसे मुलाकात की।
होरट्टी ने पत्रकारों से कहा, ''सत्तारूढ़ पार्टी चाहती है कि मैं इस्तीफा दे दूं। मुख्यमंत्री ने मुझसे फ़ोन पर दो बार बात की। कल उन्होंने मुझे व्यक्तिगत मुलाकात के लिए बुलाया और बताया कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें मुझसे इस्तीफा मांगने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर मैंने इस्तीफा नहीं दिया, तो कांग्रेस मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लायेगी।''
उन्होंने कहा कि वह 'सम्मानपूर्वक' इस्तीफ़ा देना चाहते हैं और उन्होंने 14 अगस्त को ऐसा करने का फ़ैसला किया है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पद छोड़ने से पहले वह सदन को घटनाक्रम के बारे में जानकारी देंगे।
उन्होंने कहा, ''देखते हैं सदन क्या कहता है।''
सभापति ने यह भी कहा कि वह इस घटनाक्रम से 'बहुत दुखी' हैं।
होरट्टी ने कहा कि सदन में कांग्रेस के पास बहुमत है और वह अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए आसानी से उन्हें पद से हटा सकती है, ऐसे में उन्होंने इतने सालों में जो सम्मान कमाया है, उसे बचाए रखने के लिए उन्होंने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है।
उन्होंने कहा, '' जब यह राय हो कि मुझे अब इस पद पर नहीं रहना चाहिए, तो मैं इस पर बने नहीं रहना चाहता। मैं इस्तीफ़ा दे दूंगा।''
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने उन्हें बताया कि उन्हें हटाने का फ़ैसला पार्टी आलाकमान का है और वह व्यक्तिगत रूप से उनका बहुत सम्मान करते हैं।
यह घटनाक्रम कांग्रेस आलाकमान द्वारा सोमवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार को भेजे गए उस पत्र के बाद सामने आया है जिसमें सलीम अहमद के नाम को विधान परिषद के सभापति और उमाश्री के नाम को उपसभापति पद के लिए मंजूरी दी गई थी। इसी पत्र में सोमवार को शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची भी शामिल थी।
कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए जी. एस. पाटिल और उपाध्यक्ष पद के लिए ए. एस. पोन्नन्ना के नाम को भी मंजूरी दी है।
होरट्टी ने कांग्रेस के कदम पर अपनी आपत्ति दोहराते हुए इसे "अभूतपूर्व" बताया। उन्होंने कहा कि विधानपरिषद के सभापति और विधानसभा के अध्यक्ष को चुनना सदन का अधिकार है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के आलकमान का।
उन्होंने कहा, "यह लोकतंत्र-विरोधी कदम है। मुझे दुख है।"
होरट्टी ने मंगलवार को कहा था कि 1956 के बाद से किसी भी सभापति को इस्तीफा देने के लिए बाध्य नहीं किया गया और सभी ने अपना कार्यकाल पूरा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें हटाने का कोई आधार नहीं है।
उन्होंने कहा, '' मुझपर कोई आरोप नहीं है। मैं हमेशा निष्पक्ष एवं ईमानदार रहा हूं। यह सभी जानते हैं।''
हरिप्रसाद ने बुधवार को पत्रकारों से कहा था, ''अगर होरट्टी इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो कुछ प्रक्रियाएं हैं जिनका हम पालन करेंगे।''
आठ बार विधान परिषद सदस्य रह चुके 80 वर्षीय होरट्टी का वर्तमान कार्यकाल जुलाई 2028 तक है। वह दिसंबर 2022 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासनकाल के दौरान विधान परिषद के निर्विरोध सभापति चुने गए थे।
कर्नाटक की 75 सदस्यीय विधानपरिषद में कांग्रेस के 38, भाजपा के 24 और जनता दल (सेक्युलर) के छह सदस्य हैं। इसके अलावा एक निर्दलीय सदस्य और एक सभापति हैं, जबकि पांच सीटें रिक्त हैं।
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश
0608 2024 बेंगलुरु