ओजेम्पिक फेस' के बाद अब 'ओजेम्पिक हेयर' को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी
दिलीप
- 01 Aug 2026, 09:00 PM
- Updated: 09:00 PM
(पायल बनर्जी)
नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) व्यापक चर्चा का विषय बने 'ओजेम्पिक फेस' के बाद अब त्वचा रोग विशेषज्ञ ओजेम्पिक, वेगोवी और माउनजारो जैसी जीएलपी-1 श्रेणी की वजन घटाने वाली दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और कई मामलों में उनके दुरुपयोग से जुड़े एक और उभरते दुष्प्रभाव को लेकर चेतावनी दे रहे हैं।
इसे आम बोलचाल में 'ओजेम्पिक हेयर' कहा जाता है। इस स्थिति में तेजी से वजन घटने के बाद बाल सामान्य से अधिक झड़ने लगते हैं।
'ओजेम्पिक फेस' यानी तेजी से वजन घटने के कारण चेहरे का पिचकना और ढीला पड़ जाना।
हालांकि, मोटापे और मधुमेह के इलाज में इन दवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन त्वचा और बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इनका जरूरत से अधिक इस्तेमाल, डॉक्टर की निगरानी के बिना सेवन और बिना चिकित्सकीय सलाह के खुले बाजार से खरीदकर उपयोग करने के कारण बड़ी संख्या में लोगों में अस्थायी से लेकर गंभीर स्तर तक बाल झड़ने की समस्या सामने आ रही है।
दिल्ली स्थित डर्मालाइफ स्किन एंड हेयर क्लीनिक के वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ, हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. गौरव गर्ग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में त्वचा रोग क्लीनिकों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है।
उन्होंने कहा, "हम जीएलपी-1 श्रेणी की वजन घटाने वाली दवाएं लेने के बाद अत्यधिक बाल झड़ने की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देख रहे हैं। हमारे क्लीनिक में आने वाले ऐसे मरीजों में लगभग 40 प्रतिशत को हल्के से लेकर गंभीर स्तर तक बाल झड़ने की समस्या है। कई लोगों ने बताया कि बाल धोते या कंघी करते समय गुच्छों में झड़ रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में दवा सीधे तौर पर बालों को नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि तेजी से वजन घटना, पोषण संबंधी कमी और शरीर पर पड़ने वाला चयापचय संबंधी दबाव इसकी मुख्य वजह है।
डॉ. गर्ग ने कहा, ''दुर्भाग्य से हम ऐसे लोगों को भी देख रहे हैं, जो सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर बिना डॉक्टर की निगरानी के या खुले बाजार से ये दवाएं खरीदकर इस्तेमाल कर रहे हैं। ओजेम्पिक आपके बालों का दुश्मन नहीं है, बल्कि कुपोषण और चयापचय संबंधी दबाव असली कारण हैं। विशेषज्ञों की देखरेख में धीरे-धीरे वजन घटाने और उचित पोषण लेने से इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।''
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, 'ओजेम्पिक हेयर' कोई मान्यता प्राप्त चिकित्सीय बीमारी नहीं है, बल्कि यह 'टेलोजन एफ्लुवियम' नामक अस्थायी तनाव-जनित बाल झड़ने की स्थिति का प्रचलित नाम है।
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के त्वचा रोग विभाग में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. नीतू भरी ने कहा कि तेजी से वजन घटना शरीर पर शारीरिक तनाव पैदा करता है, जिससे बड़ी संख्या में बालों की जड़ें समय से पहले विश्राम अवस्था में चली जाती हैं। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम आमतौर पर तीन से चार महीने बाद स्पष्ट रूप से बाल झड़ने के रूप में दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान भूख कम लगने से प्रोटीन, आयरन, जिंक और बायोटिन जैसे बालों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है।
हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों से संकेत मिलता है कि यह समस्या पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो सकती है।
वर्ष 2025 में 'पबमेड सेंट्रल (पीएमसी)' में प्रकाशित 'प्रिवेलेंस एंड प्रेडिक्टर्स ऑफ हेयर शेडिंग अमंग जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट यूजर्स' शीर्षक वाले अध्ययन में पाया गया कि वास्तविक परिस्थितियों में जीएलपी-1 दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लगभग 10 में से सात लोगों ने किसी न किसी स्तर पर बाल झड़ने की शिकायत की।
डॉ. भरी ने कहा कि मरीज अक्सर तकिए, बाथरूम के फर्श और हेयरब्रश पर सामान्य से अधिक बाल मिलने की शिकायत करते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों में सिर के बाल पतले होने और मांग चौड़ी होने जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं।
उन्होंने कहा, "हालांकि यह समस्या आमतौर पर अस्थायी होती है और समय के साथ ठीक हो सकती है, लेकिन अचानक बाल झड़ने से विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं में मानसिक तनाव और चिंता बढ़ सकती है।"
उन्होंने कहा कि ऐसी दवाएं कभी भी डॉक्टर की निगरानी के बिना नहीं लेनी चाहिए।
स्व-चिकित्सा की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए डॉ. गर्ग ने कहा, "आज सबसे बड़ी चिंता यह है कि वजन घटाने वाले इन इंजेक्शन को विशेष चिकित्सीय जरूरत के लिए निर्धारित दवा के बजाय त्वरित सौंदर्य समाधान के रूप में देखा जा रहा है। कई लोग सोशल मीडिया या दोस्तों की सलाह पर इनके पोषण संबंधी दुष्प्रभाव समझे बिना इनका इस्तेमाल शुरू कर देते हैं।"
उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में बाल झड़ना अस्थायी होता है, लेकिन रोकथाम इलाज से बेहतर है।
इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए मेदांता अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के निदेशक डॉ. रमणजीत सिंह ने कहा, "'ओजेम्पिक हेयर' की बढ़ती प्रवृत्ति केवल तेजी से वजन घटने से ही नहीं, बल्कि बिना उचित चिकित्सकीय जांच के इन दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल के जोखिम को भी उजागर करती है। हम लगातार ऐसे लोगों को देख रहे हैं जो विशेषज्ञ से सलाह लिए बिना वजन घटाने की दवाएं ले रहे हैं या जल्दी परिणाम पाने के लिए निर्धारित मात्रा से अधिक उपयोग कर रहे हैं।"
त्वचा रोग विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि वजन घटाने की कोई भी चिकित्सकीय दवा शुरू करने से पहले पूरी स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए और कभी भी स्वयं दवा नहीं लेनी चाहिए।
भाषा अमित दिलीप
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