भिवंडी महापौर ने अधिकारियों को जर्जर इमारतों के बिजली-पानी कनेक्शन काटने का दिया निर्देश
माधव
- 01 Aug 2026, 05:41 PM
- Updated: 05:41 PM
भिवंडी (महाराष्ट्र), एक अगस्त (भाषा) भिवंडी के बालाजी नगर इलाके में चार मंजिला इमारत ढहने से 10 लोगों की मौत की घटना के बाद महापौर नारायण रतन चौधरी ने शनिवार को निर्देश दिया कि खतरनाक घोषित सभी इमारतों को जल्द से जल्द खाली कराया जाना सुनिश्चित करने के लिए उनके पानी-बिजली के कनेक्शन काट दिए जाएं।
अधिकारियों ने बताया कि भिवंडी-निजामपुर शहर महानगर पालिका (बीएनसीएमसी) के महापौर चौधरी ने कोहिनूर इमारत के ढहने के बाद आपदा प्रबंधन की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
शुक्रवार को ढही इस इमारत को छह साल पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका था।
उपायुक्त (अनाधिकृत निर्माण) विक्रम दराडे ने बैठक में सूचित किया कि नगर निगम सीमा के भीतर 238 इमारतों को 'सी1' श्रेणी (अत्यंत खतरनाक, तुरंत गिराने लायक) और 836 इमारतों को 'सी2ए' श्रेणी (खतरनाक, व्यापक मरम्मत कार्य और खाली कराने की जरूरत) के तहत वर्गीकृत किया गया है।
मेयर ने 'सी1' और 'सी2ए' श्रेणी की सभी इमारतों के पानी और बिजली के कनेक्शन तुरंत काटने के आदेश दिए।
चौधरी ने कहा, ''संपत्ति मालिकों या निवासियों को बेदखली जारी करने नोटिस के साथ आधिकारिक स्थल निरीक्षण रिपोर्ट भी संलग्न की जानी चाहिए। जिन्हें अस्थायी आश्रय की आवश्यकता है, उन्हें पांच से छह दिन के लिए नगर निगम के स्वामित्व वाली इमारतों में ठहराया जा सकता है।''
खतरनाक संचरनाओं के बिजली कनेक्शन काटने की जिम्मेदार बिजली वितरण कंपनी 'टॉरेंट पावर' होगी, वहीं वार्ड अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कंपनी को समय पर आधिकारिक सूचना भेजी जाए।
वार्ड अधिकारियों को खतरनाक इमारतों में अनधिकृत मरम्मत कार्य को रोकने के लिए रात्रि दौरों सहित आकस्मिक निरीक्षण करने के भी आदेश दिए गए।
ठाणे जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून सत्र के दौरान विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के कारण 30 लोगों की जान जा चुकी है।
इस बीच, मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए ठाणे महानगर पालिका के आयुक्त सौरभ राव ने वार्ड समितियों को ठाणे शहर की सभी 'सी1' श्रेणी की इमारतों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
राव ने कहा कि इमारतों को खाली कराए जाने के दौरान निवासियों के संपत्ति संबंधी अधिकार सुरक्षित रखने के लिए नगर निकाय के अधिकारियों को किरायेदारों और फ्लैट मालिकों को उनके आवास के कारपेट क्षेत्र का प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को नगर निगम के अस्थायी आवास शिविरों में ठहराया जा सकता है।
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