शबरिमला के लिए घी की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं की जांच अपराध शाखा करेगी: केरल के मंत्री
पारुल
- 01 Aug 2026, 12:41 AM
- Updated: 12:41 AM
तिरुवनंतपुरम, 31 जुलाई (भाषा) केरल के देवस्वओम मंत्री के मुरलीधरन ने शुक्रवार को कहा कि देवस्वओम सचिव की रिपोर्ट के आधार पर शबरिमला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर में घी की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं की जांच पुलिस की अपराध शाखा करेगी।
मंत्री ने एक बयान में कहा कि देवस्वओम सचिव की रिपोर्ट में ''चौंकाने वाले निष्कर्ष'' सामने आए हैं और इस मामले की जांच अपराध शाखा को सौंपने के लिए गृह विभाग से अनुरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ''जांच समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।''
मुरलीधरन ने शबरिमला मंदिर में घी की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं को ''आपराधिक लापरवाही'' करार देते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) ने वर्ष 2025-26 की तीर्थयात्रा के दौरान 1.65 लाख लीटर घी की आपूर्ति के लिए राज्य सरकार के स्वामित्व वाले सहकारी दुग्ध संस्थान 'मिल्मा' के साथ समझौता किया था।
मुरलीधरन ने बताया कि मिल्मा ने 1.50 लाख लीटर घी की आपूर्ति की, जबकि शेष की आपूर्ति नहीं की जा सकी।
मंत्री ने कहा कि घी 5,000-5,000 लीटर की 30 खेप में शबरिमला पहुंचा, लेकिन इनमें से केवल छह खेप की ही जांच की जा सकी और सभी (खेप) निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
उन्होंने कहा, ''यह केवल खाद्य पदार्थ में मिलावट का मामला नहीं है। यह श्रद्धालुओं की आस्था के साथ धोखा, खिलवाड़ और विश्वासघात करने जैसा है।''
मुरलीधरन ने कहा कि जांच में यह पता लगेगा कि कथित अनियमितताएं घी के शबरिमला पहुंचने से पहले हुईं या वहां पहुंचने के बाद।
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं फिर न हों।
मंत्री ने बताया कि सुधारात्मक उपायों के तहत अब से शबरिमला में इस्तेमाल होने वाले घी की प्रत्येक खेप की अलग-अलग गुणवत्ता जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि घी की खरीद बाहरी एजेंसियों से की जाती है, तो विनिर्माण इकाई से लेकर शबरिमला तक पूरी आपूर्ति शृंखला की डिजिटल निगरानी की जाएगी। इसके तहत घी की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।
इससे पहले, टीडीबी के अध्यक्ष के जयकुमार ने शुक्रवार को शबरिमला मंदिर में 2025 की तीर्थयात्रा के दौरान घी की आपूर्ति में कथित गड़बड़ी में बोर्ड की कोई भूमिका होने से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि विवाद सामने आने से पहले ही बोर्ड ने इस साल की तीर्थयात्रा के लिए बाहर से घी नहीं खरीदने का निर्णय लिया था।
देवस्वओम मंत्री मुरलीधरन ने शबरिमला मंदिर में इस्तेमाल के लिए 'मिल्मा' से घी की खरीद और ढुलाई में कथित अनियमितता की जांच का आदेश दिया था। इसके कुछ दिन बाद, जयकुमार की यह टिप्पणी आई है।
जयकुमार ने संवाददाताओं से कहा कि जब तक यह मामला मीडिया में नहीं आया, तब तक उन्हें या बोर्ड को पिछली तीर्थयात्रा के दौरान 'मिल्मा' द्वारा उपलब्ध कराए गए घी की गुणवत्ता के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली थी।
उन्होंने कहा, ''इन आरोपों के सामने आने से पहले ही, इस साल 'अरावणा' (प्रसाद) बनाने और दूसरी जरूरतों के लिए खरीददारी को अंतिम रूप देते समय, हमने बाहर से घी न खरीदने का निर्णय लिया और ऐसा इस विवाद की वजह से नहीं किया गया। हमें लगा कि जब शबरिमला में श्रद्धालुओं द्वारा काफी मात्रा में लाया गया घी उपलब्ध है, तो घी खरीदने की कोई जरूरत नहीं है। अब पीछे मुड़कर देखने पर हमें लगता है कि यह एक अच्छा फैसला था।''
जयकुमार ने कहा कि पिछली तीर्थयात्रा के दौरान 'मिल्मा' द्वारा उपलब्ध कराए गए घी की सभी खेप को शबरिमला में खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रयोगशाला में नमूने की जांच के बाद ही मंजूरी दी गई थी।
उन्होंने कहा, ''सिर्फ नमूने की ही जांच की जा सकती है। पूरी मात्रा की जांच नहीं हो सकती। हर खेप को प्रयोगशाला में जांच के बाद मंजूरी दी गई थी और उस समय इसकी गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत नहीं की गई थी।''
जयकुमार से जब उन आरोपों के बारे में पूछा गया कि 'मिल्मा' की जांच में पता चला था कि असली घी की जगह घटिया घी दिया गया था, तो उन्होंने कहा कि 'मिल्मा' द्वारा नियुक्त ठेकेदार के लिए बोर्ड जिम्मेदार नहीं है।
जयकुमार ने कहा, ''अगर आपूर्ति शृंखला में कोई गड़बड़ी हुई थी, तो सरकार और दूसरी एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। अगर हमारे पास घटिया घी पहुंचा था, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन सारा घी पहले ही 'अरावणा' बनाने, दीये जलाने और मंदिर के दूसरे कामों में इस्तेमाल हो चुका है। अब कोई घी नहीं बचा है।''
इस बात को नकारते हुए कि बोर्ड अपनी जिम्मेदारियां निभाने में नाकाम रहा, जयकुमार ने कहा कि बोर्ड ने खरीद का काम 'मिल्मा' को सौंपा था और यह सुनिश्चित किया था कि घी को प्राप्त करने से पहले प्रयोगशाला में उसकी जांच की जाए।
भाषा सुरभि पारुल
पारुल
0108 0041 तिरुवनंतपुरम