दिल्ली दंगे 2020: राजनीति से उम्रकैद तक का ताहिर हुसैन का सफर
अविनाश
- 31 Jul 2026, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) अल्पसंख्यक मतदाता बहुल मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) उम्मीदवार की हार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत का मार्ग प्रशस्त करने के एक साल बाद, ताहिर हुसैन को शुक्रवार को 2020 के दिल्ली दंगों के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
शहर की एक अदालत ने उसे और चार सह-दोषियों को दंगों के दौरान आसूचना ब्यूरो (आईबी) के कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कहा कि यह मामला मृत्युदंड के लिए " दुर्लभतम" श्रेणी में नहीं आता है।
इसके बाद अदालत से बाहर ले जाए जाने के दौरान हुसैन ने उम्मीद जताते हुए कहा, "इंसाफ हाईकोर्ट से मिलेगा।"
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़कने के दौरान 48 वर्षीय हुसैन नेहरू विहार वार्ड से 'आप' का पार्षद था। इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे।
दंगों के सिलसिले में नाम आने, खासकर चांद बाग इलाके में आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में नाम सामने आने के कुछ ही दिनों बाद 'आप' ने हुसैन को निष्कासित कर दिया था।
दंगों के दौरान हुसैन के घर की छत पर मौजूद भीड़ का वीडियो वायरल होने के बाद उसकी काफी बदनामी हुई। उसके आवास के पास एक नाले से शर्मा का शव बरामद हुआ था।
आरोप था कि उसके घर और छत का इस्तेमाल पत्थर, पेट्रोल बम और अन्य हथियार जमा करने के लिए किया गया था। दिल्ली पुलिस ने दंगों से जुड़े कई आपराधिक मामलों में हुसैन को नामजद किया और मार्च 2020 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
इस महीने की शुरुआत में, अदालत ने हुसैन को चार अन्य सह-आरोपियों के साथ शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। यह कहा गया कि हुसैन 2020 के दंगों के दौरान दंगा, आगजनी और लूटपाट में शामिल गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा था। यह भी कहा गया कि शर्मा की हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई थी।
हुसैन दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले दिसंबर 2024 में जेल में रहते हुए ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) में शामिल हो गया था।
एआईएमआईएम उम्मीदवार के रूप में, उसने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र से फरवरी 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ा। यह इलाका दंगों के दौरान सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र था। हुसैन को 33,000 से अधिक वोट मिले।
भाजपा उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने 'आप' के आदील अहमद खान को 17,000 से अधिक मतों के अंतर से हराकर चुनाव जीता।
चुनाव प्रचार के लिए हुसैन को छह दिन की पैरोल मिली थी। राजनीति में आने से पहले, वह कारोबार करता था और उत्तर-पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में रहता था।
सजा सुनाए जाने के बाद भी हुसैन की राजनीतिक अहमियत कम नहीं हुई। भाजपा ने उसके नाम का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी से उसके पुराने संबंधों को लेकर हमला बोला और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से माफी मांगने की मांग की।
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