मद्रास उच्च न्यायालय ने द्रमुक नेता सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
सिम्मी
- 30 Jul 2026, 01:45 PM
- Updated: 01:45 PM
चेन्नई, 30 जुलाई (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन एवं सतर्कता निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा दर्ज तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टासमैक) घोटाला मामले में पूर्व मंत्री और द्रमुक नेता वी. सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति जी. के. इलंथिरैयन ने सेंथिल बालाजी पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के अभियोजन पक्ष के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी संख्या-1 सेंथिल बालाजी के करीबी सहयोगी रहे सभी अधिकारियों ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग किया, आपराधिक साजिश रची और विभिन्न अपराध किए।
उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों ने हेरफेर के विभिन्न तरीकों से अनुचित लाभ प्राप्त किया और सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
भ्रष्टाचार निरोधक एवं सतर्कता निदेशालय (डीवीएसी) ने अपनी प्राथमिकी में कहा है कि सेंथिल बालाजी ने टासमैक के कामकाज में हेरफेर करने के लिए आपराधिक साजिश रची। इसके तहत बार लाइसेंस और परिवहन ठेकों की निविदाओं में धांधली की गई, कुछ चुनिंदा शराब निर्माताओं को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे शराब की कीमतें बढ़ीं और सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान हुआ।
डीवीएसी ने इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
सेंथिल बालाजी, टासमैक के पूर्व प्रबंध निदेशक एस. विसाकन और पांच अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में बार लाइसेंस आवंटन, परिवहन ठेकों तथा कुछ डिस्टिलरी और बॉटलिंग कंपनियों द्वारा कथित फर्जी एवं बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए लेनदेन के जरिए धन के गबन, खरीद प्रक्रिया और निविदा प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप लगाए गए हैं।
अन्य पांच आरोपियों में सेंथिल बालाजी के करीबी सहयोगी राथेश राज षणमुगावेल और एस. कार्तिक (उर्फ मुलानूर कार्तिक), उनके पूर्व निजी सहायक भास्कर तथा टासमैक के पूर्व अधिकारी आर. रामदुरई मुरुगन और आर. पनीरसेल्वम शामिल हैं।
प्राथमिकी में ''करूर गैंग'' नामक एक कथित संगठित गिरोह के संचालन का उल्लेख किया गया है, जिस पर कार्तिक का नियंत्रण होने का आरोप है।
आरोप है कि यह गिरोह करूर जिले के सभी शराब बार संचालित करता था और अधिकारियों पर दबाव डालकर पूरे तमिलनाडु में अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को बार लाइसेंस आवंटित कराता था।
प्राथमिकी में करोड़ों रुपये के एक सुनियोजित नकद कमीशन तंत्र का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत बोतल आपूर्ति करने वाली कंपनियां डिस्टिलरी के नाम पर फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाती थीं।
प्राथमिकी के अनुसार, टासमैक की खुदरा दुकानों पर उपभोक्ताओं से अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक राशि व्यवस्थित तरीके से वसूली जाती थी। सामान्य शराब की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपये से 100 रुपये और विदेशी शराब पर 500 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जाते थे।
सेंथिल बालाजी तमिलनाडु विधानसभा में कोयंबटूर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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