मानसून सत्र के लिए सांसदों को परामर्श: धरना, तख्तियां लहराने और धार्मिक अनुष्ठान करने से परहेज करें
पवनेश
- 15 Jul 2026, 08:25 PM
- Updated: 08:25 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा सचिवालय ने सांसदों को संसद भवन परिसर में प्रदर्शन, धरना, नारेबाजी, तख्तियां लहराने, हथियार लेकर आने और धार्मिक अनुष्ठान करने से बचने की सलाह दी है।
सांसदों को यह परामर्श भी दिया गया कि वे सत्र के दौरान संसद परिसर में स्मार्ट वॉच (स्मार्ट घड़ियों) या स्मार्ट चश्मों का इस तरह से उपयोग न करें जिससे संसद सदस्यों की सुरक्षा, विशेषाधिकारों और निजता से कोई समझौता हो।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा।
लोकसभा सचिवालय ने अलग-अलग संसदीय बुलेटिन में यह भी कहा है कि उसके संज्ञान में आया है कि पोस्टर, तख्तियों और बैनरों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किए गए चित्र, तस्वीरें और आपत्तिजनक प्रकृति के नारे प्रदर्शित किए जा रहे हैं। सचिवालय ने सदस्यों से सत्र के दौरान संसद परिसर में इस तरह की गतिविधियों से बचने का अनुरोध किया है।
सचिवालय ने एक बुलेटिन में कहा, ''सदस्यों से अनुरोध है कि वे संसद भवन के प्रवेश द्वारों के सामने विरोध-प्रदर्शन या धरना आयोजित न करें, क्योंकि इससे सदनों की बैठक के दौरान सांसदों के संसद कक्षों तक आने-जाने में गंभीर बाधा उत्पन्न होती है। इस संबंध में सदस्यों का ध्यान लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश 124ए(2) की ओर आकर्षित किया जाता है। संसद भवन के प्रवेश द्वारों को अवरोधमुक्त रखना सांसदों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है। माननीय सदस्यों से सहयोग का अनुरोध है।''
सचिवालय ने सांसदों से यह भी आग्रह भी किया है कि वे संसद भवन परिसर का उपयोग किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, धरने, हड़ताल, अनशन या किसी धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन के लिए न करें।
सचिवालय की ओर से जारी एक अन्य बुलेटिन में कहा गया है कि संसद भवन परिसर के भीतर के क्षेत्र और मार्ग सांसदों के लिए बिना किसी अवरोध के खुले रहें, यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परिसर में कई गतिविधियों पर रोक है। इनमें किसी तरह के शस्त्र, बैनर, तख्तियां, लाठियां, भाले, तलवारें, डंडे आदि लेकर आना शामिल है।
विपक्षी दलों के प्रदर्शन, नारेबाजी और विभिन्न मुद्दों पर तख्तियां दिखाने के कारण अतीत में संसद की कार्यवाही कई बार लंबे समय तक बाधित रही है। इसके चलते कई सत्रों में सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी और कई दिनों तक कोई खास कामकाज नहीं हो सका।
पिछले बजट सत्र के दौरान सदन में कथित अनुशासनहीन व्यवहार के कारण निलंबित किए गए कई सांसदों ने संसद के एक प्रवेश द्वार पर कई दिनों तक विरोध-प्रदर्शन किया था।
भाषा हक हक पवनेश
पवनेश
1507 2025 दिल्ली