रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतें ध्वस्त करने का दिया आदेश
खारी
- 15 Jul 2026, 09:44 PM
- Updated: 09:44 PM
रामपुर (उप्र), 15 जुलाई (भाषा) रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित बताते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है।
इस विश्वविद्यालय की स्थापना समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान ने की थी। वर्तमान में जेल में बंद आजम खान विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति तथा इसकी संचालक संस्था मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत विस्तृत सुनवाई और अभिलेखों की जांच के बाद विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया।
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि जौहर विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर बिना अनुमति किए गए निर्माण के संबंध में क्षेत्रीय कनिष्ठ अभियंता की रिपोर्ट मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। इसके बाद संस्थान ने आठ जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया और 15 जुलाई को विश्वविद्यालय तथा रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से उपस्थित अधिकारियों और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में व्यक्तिगत सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय सिंगनखेड़ा गांव में स्थित है, जो 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। इसलिए आरडीए से भवन निर्माण योजना की स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं थी।
विश्वविद्यालय की ओर से यह भी कहा गया कि अधिकांश इमारतों का निर्माण काफी पहले हो चुका था, इसलिए मौजूदा नियमों के आधार पर उन्हें अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
हालांकि, आरडीए ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण के समय सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य था, चाहे बाद में उस क्षेत्र को विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया हो या नहीं।
प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, रामपुर जिला पंचायत से प्राप्त अभिलेखों से पता चलता है कि केवल मेडिकल कॉलेज भवन और अकादमिक खंड के नक्शे ही स्वीकृत किए गए थे, जबकि शेष 38 इमारतों के लिए कोई वैध अनुमति नहीं ली गई थी।
आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्माण स्वीकृति की आवश्यकता की जानकारी थी, क्योंकि उसने दो इमारतों के लिए जिला पंचायत से अनुमति प्राप्त की थी। इसके बावजूद शेष 38 भवनों का निर्माण बिना स्वीकृति के कराया गया।
आरडीए ने महायोजना, क्षेत्रीय योजना और अधिनियम के अन्य प्रावधानों का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय की कानूनी दलीलों को भी खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया है कि किसी भी निर्माण की वैधता इस बात पर निर्भर करती है कि निर्माण के समय लागू कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की महत्वाकांक्षी परियोजना मानी जाने वाली मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित एक अधिनियम के तहत की गई थी। बाद में इस परियोजना को भूमि पर कथित अवैध कब्जे और पट्टे की शर्तों के उल्लंघन से जुड़े कई कानूनी विवादों का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2026 की शुरुआत में आजम खान और उनका परिवार औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय का संचालन करने वाले ट्रस्ट से अलग हो गए थे।
आरडीए के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता फखरूल हसन ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार विकास के बजाय ''तोड़फोड़ की नीति'' अपना रही है।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और सरकार शिक्षण संस्थानों को निशाना बना रही है।
वहीं, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर चुनिंदा विपक्षी नेताओं के खिलाफ ''बुलडोजर की कार्रवाई'' कर रही है।
उन्होंने सवाल किया कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े उन लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जिन पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
रावत ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता इन घटनाक्रमों को देख रही है और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी।
भाषा सं सलीम खारी
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1507 2144 रामपुर (उत्तर प्रदेश)