'भ्रष्टाचार' से जुड़ी फाइल गायब; सीआईसी ने जांच में देरी को सबूत मिटाने की कोशिश बताया
अविनाश
- 14 Jul 2026, 08:28 PM
- Updated: 08:28 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा कि पुडुचेरी में सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइल के गायब होने और मामले की जांच शुरू करने में हुई एक साल की देरी को "हल्के में नहीं लिया जा सकता", क्योंकि यह देरी "जानबूझकर" की गई, ताकि इसमें शामिल लोग सबूत मिटा सकें।
सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने 'एम-बुक' संख्या-667 के गायब होने के लिए पुडुचेरी की यानम नगरपालिका को फटकार लगाई, जो एक सड़क परियोजना से जुड़ा आधिकारिक इंजीनियरिंग रिकॉर्ड था, जिसमें आठ लाख रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप है।
सीआईसी ने इस घटना को "सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संस्थागत उदासीनता का एक ऐसा पैटर्न बताया, जो जनता के प्रति जवाबदेही की जड़ पर प्रहार करता है।"
आयोग ने नगरपालिका को निर्देश दिया कि वह एक तय समय-सीमा में जांच पूरी करे, गायब रिकॉर्ड के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करे, जांच शुरू करने में हुई देरी का कारण बताए और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत जांच रिपोर्ट का खुलासा करे।
यह मामला तब सीआईसी के पास पहुंचा, जब एक आरटीआई आवेदक ने यह जानकारी मांगी कि एम-बुक संख्या-667 कहां है, उसकी देखरेख के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन है और उसके गायब होने के बारे में पुलिस में कोई शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं।
यानम नगरपालिका के मुताबिक, तत्कालीन सहायक अभियंता ने जुलाई 2023 में एम-बुक की सूची सौंपी थी, लेकिन सत्यापन के दौरान एम-बुक संख्या-667 सहित तीन एम-बुक गायब पाई गईं।
नगरपालिका के अनुसार, शुरू में अधिकारियों को लगा कि संबंधित रिकॉर्ड बिलों के निपटान के लिए लेखा एवं कोषागार विभाग (डीएटी) के पास भेजा गया है, लेकिन बाद में उसका कोई पता नहीं चल सका।
नगरपालिका ने कहा कि दस्तावेज का पता लगाने के प्रयास बार-बार विफल रहने के बाद फरवरी 2025 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। हालांकि, उसने बताया कि विभागीय जांच समिति का गठन एक साल बाद फरवरी 2026 में किया गया।
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने आरोप लगाया कि एम-बुक संख्या-667 एक अहम साक्ष्य थी, जिसे कथित रूप से जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए जानबूझकर गायब या नष्ट कर दिया गया।
आयोग ने कहा कि यानम पुलिस ने 11 मार्च 2025 की अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला था कि एम-बुक के रखरखाव और उसे अधिकृत अधिकारियों को सौंपने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा न किया जाना इन दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है।
आयोग ने कहा कि पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद भी नगर निकाय ने जांच समिति गठित करने में एक साल से अधिक का समय लगा दिया और इस देरी का कोई स्पष्ट कारण या औचित्य नहीं बताया गया है।
सीआईसी ने जांच समिति को निर्देश दिया कि वह समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करे और यह भी सार्वजनिक करे कि रिकॉर्ड आखिरी बार किन अधिकारियों की देखरेख में था।
आयोग ने जांच समिति से यह भी कहा कि वह जांच शुरू करने में हुई देरी का कारण हलफनामे के माध्यम से स्पष्ट करे, अंतिम जांच रिपोर्ट की प्रति अपीलकर्ता को उपलब्ध कराए और आरटीआई अधिनियम की धारा-4 के तहत उसे खुद सार्वजनिक भी करे।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश
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