कर्नाटक में एसआईआर के तहत घर-घर जाकर गणना प्रपत्र बांटने का अभियान शुरू
पवनेश
- 30 Jun 2026, 09:19 PM
- Updated: 09:19 PM
बेंगलुरु, 30 जून (भाषा) कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत घर-घर जाकर गणना का अभियान मंगलवार से शुरू हो गया।
इस कवायद के तहत 29 जुलाई तक 5.54 करोड़ से ज़्यादा मतदाता इसके दायरे में आएंगे।
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जरूरतमंद लोगों को स्थायी निवास प्रमाण-पत्र (पीआरसी) जारी किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेंगलुरु साउथ के उपायुक्त और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में अपनी पत्नी उषा शिवकुमार के साथ अपना प्रपत्र भरा जिसके साथ इस कवायद की शुरुआत हुई।
उन्होंने राज्य के मतदाताओं से एसआईआर में सक्रिय रूप से भाग लेने, 29 जुलाई की समय-सीमा से पहले अपने गणना फ़ॉर्म जमा करने और अपने चुनावी रिकॉर्ड को अद्यतन रखने के लिए अपने मोबाइल नंबर अपडेट करने का आग्रह किया।
शिवकुमार ने कहा, "हम सभी को अपने मतदान के अधिकार की रक्षा करने का प्रयास करना चाहिए।"
उन्होंने लोगों को आगाह किया कि तय समय के भीतर गणना फ़ॉर्म जमा न करने पर वोट देने का अधिकार छिन सकता है और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने में मुश्किलें आ सकती हैं।
शिवकुमार ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से महीने भर चलने वाली इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की मदद के लिए कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा सहयोग तंत्र बनाया है, जिसमें हज़ारों सुविधा केंद्र, हेल्पलाइन और ऑनलाइन सेवाएं शामिल हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, इस कवायद का मकसद आने वाले चुनावों के लिए एक साफ़-सुथरी और त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसमें अयोग्य मतदाताओं का नाम शामिल न हो।
आयोग ने बताया कि कर्नाटक में अभी 5,54,32,314 मतदाता हैं (16 जून 2026 तक), जिन्हें एसआईआर के दायरे में शामिल किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने सोमवार को बताया कि बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) 30 जून से घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करना शुरू करेंगे। इसके साथ ही 2026 की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य शुरू हो गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे। मसौदा मतदाता सूची पांच अगस्त को प्रकाशित की जाएगी।
पत्रकारों से बात करते हुए, अंबुकुमार ने मतदाताओं से बीएलओ के साथ सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा, "भले ही किसी मतदाता की 'मैपिंग' अभी तक न हुई हो, फिर भी गणना फ़ॉर्म उनके घर तक पहुंचाया जाएगा।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि गणना के चरण में मतदाताओं को कोई भी दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि पांच अगस्त से चार सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। जहां आवश्यक होगा, वहां नोटिस जारी किए जाएंगे और पांच अगस्त से तीन अक्टूबर के बीच दावों एवं आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा।
अंतिम मतदाता सूची सात अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।
अंबुकुमार ने कहा, ''कर्नाटक में इस अभियान के लिए पूरी प्रशासनिक व्यवस्था तैयार है। हमने 68,123 अधिकारियों को तैनात किया है, जिनमें 59,050 बूथ स्तरीय अधिकारी, 7,556 बूथ स्तरीय पर्यवेक्षक और 224 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी शामिल हैं। सभी अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और वे इस कार्य के लिए पूरी तरह तैयार हैं।''
उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों ने लगभग 1.15 लाख बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए हैं, जिनमें से अधिकांश को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
इस बीच, एसआईआर से पहले, सरकार ने सोमवार को स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) जारी करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश और पूरे राज्य में डिजिटल और विकेंद्रीकृत सेवा माध्यमों के जरिए इन्हें तय समय में उपलब्ध कराने के लिए एक संचालनात्मक कार्यढांचा जारी किया।
सरकारी आदेश में कहा गया है कि स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) कर्नाटक राज्य में स्थायी निवास का प्रमाण माना जाएगा।
आदेश में कहा गया है कि जहां भी लागू कानूनों, सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं या योजनाओं के दिशा-निर्देशों में स्थायी निवास प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी, वहां इसके लिए एक समान व्यवस्था उपलब्ध करायी जाएगी।
दिशानिर्देशों के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी जांच और सत्यापन के बाद यदि संतुष्ट हो जाता है कि आवेदक वास्तव में कर्नाटक का स्थायी निवासी है, तो उसे पीआरसी जारी किया जा सकता है।
आदेश में पात्रता तय करने के लिए कई आधार बताए गए हैं। इनमें कर्नाटक में जन्म, राज्य में कम से कम 10 वर्ष का सामान्य निवास, कक्षा 12 या समकक्ष तक कर्नाटक के मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कम से कम 10 शैक्षणिक वर्षों तक अध्ययन, माता-पिता या जीवनसाथी का राज्य में निवास, आवासीय संपत्ति का स्वामित्व या वैध कब्जा, मतदाता सूची, आधार या राशन कार्ड जैसे सरकारी अभिलेखों में नाम, कर्नाटक में कम से कम सात वर्ष तक सरकारी या सार्वजनिक सेवा, पात्र निवासी से विवाह तथा अन्य विश्वसनीय दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक या मौखिक साक्ष्य शामिल हैं, जो यह साबित करें कि कर्नाटक ही आवेदक का मुख्य और स्थायी निवास है।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये आधार केवल उदाहरण हैं, अंतिम नहीं। इनमें से किसी एक शर्त का पूरा न होना किसी आवेदक को स्वतः अपात्र नहीं बनाएगा।
आदेश में कहा गया है कि प्रमाणपत्र जारी करने या अस्वीकार करने का प्रत्येक निर्णय कारण सहित लिखित आदेश के रूप में होना चाहिए।
आदेश के अनुसार, उप तहसीलदार, तहसीलदार या अन्य अधिकृत अधिकारी प्रमाणपत्र जारी करेंगे। प्रमाणपत्र से संबंधित आदेश के खिलाफ 30 दिनों के भीतर सहायक आयुक्त के समक्ष अपील तथा 60 दिनों के भीतर उपायुक्त के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की जा सकेगी।
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प्रशांत पवनेश
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