अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता सेम्मलाई ने पार्टी से इस्तीफा दिया
अमित
- 18 May 2026, 12:35 PM
- Updated: 12:35 PM
चेन्नई, 18 मई (भाषा) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के वरिष्ठ नेता एस. सेम्मलाई ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
सेम्मलाई ने दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद पार्टी में बढ़ती आंतरिक कलह व अवसरों की कमी पर गहरी निराशा जताई। सेम्मलाई ने अपने त्यागपत्र में पार्टी के हाल के घटनाक्रमों पर निराशा जतायी।
त्यागपत्र में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सेम्मलाई ने लिखा, ''चुनाव के बाद अन्नाद्रमुक में जो कुछ घटनाक्रम देखने को मिला, उससे मुझे गहरा दुख हुआ है। यही भावना उन लाखों कार्यकर्ताओं की भी है, जिन्होंने अपना जीवन इस आंदोलन को समर्पित कर दिया।''
उन्होंने कहा, ''जो घटनाक्रम हुआ या हो रहा है, उनमें से कोई भी संतोषजनक नहीं है।''
वरिष्ठ नेता ने सवाल किया, ''क्या यही उस आंदोलन की नियति है, जिसे क्रांतिकारी नेता एमजीआर ने खड़ा किया और अम्मा (जयललिता) ने सींचा?''
उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि मीडिया की खबरों में भी आंतरिक कलह पर उपहास उड़ाया जा रहा है। सेम्मलाई ने आरोप लगाया कि जयललिता के निधन के बाद उन्हें किनारे कर दिया गया। उन्होंने कहा, ''मेरे लिए बाधाएं खड़ी की गईं लेकिन मैं अपनी भावनाएं व्यक्त किए बिना चुपचाप काम करता रहा।''
उन्होंने कहा,''मौजूदा हालात में मेरा मन इस आंदोलन में बने रहने की इजाजत नहीं देता।''
सेम्मलाई ने यह भी याद किया कि पार्टी के दिवंगत संस्थापक एमजीआर और जयललिता ने उन्हें अनेक अवसर दिए और उन्हें ''राजनीतिक क्षेत्र में एक चमकते सितारे'' के रूप में उभरने में मदद की। उन्होंने कहा, ''भारी मन से मैंने अपने पद और पार्टी से इस्तीफा देने का फैसला किया है।''
सेम्मलाई 2001 से 2004 के बीच राज्य के स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री रहे। उन्होंने पहली बार 1980 में तारामंगलम विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता और बाद में बेहद कम उम्र में अन्नाद्रमुक में शामिल हो गए।
सेम्मलाई उन नेताओं में से रहे जिन्होंने प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सुविधाएं बांटने का खुलकर विरोध किया और राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए वैकल्पिक उपायों की वकालत की।
भाषा खारी अमित
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