बहु-खेल आयोजनों में 'छुट्टी मनाने' वाले अधिकारियों को वापस बुलाया जाएगा: मंत्रालय की चेतावनी
नमिता
- 08 May 2026, 07:28 PM
- Updated: 07:28 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) भारत के खेल प्रशासकों को चेतावनी दी गई है कि जो लोग बहु-खेल आयोजनों को 'वेतनभोगी अवकाश' की तरह लेंगे उन्हें प्रतियोगिता के बीच से ही वापस बुला लिया जाएगा ताकि खिलाड़ियों को उनकी 'लापरवाही' के कारण नुकसान नहीं हो।
देश आगामी राष्ट्रमंडल खेलों (जुलाई-अगस्त में ग्लासगो में) और एशियाई खेलों (सितंबर-अक्टूबर में जापान के आइची-नागोया) की तैयारियों में जुटा है और अंतिम रूप दिए जाने वाले दल में अधिकारियों की संख्या काफी अधिक होगी।
विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि खिलाड़ियों के साथ-साथ अधिकारियों के प्रदर्शन पर भी दोनों आयोजनों के दौरान कड़ी नजर रखी जाएगी।
राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) के एक शीर्ष अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई को बताया, ''मंत्रालय द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जो लोग खिलाड़ियों का समर्थन करने के अपने कर्तव्य में कोताही बरतते हैं और छुट्टियां मनाते पाए जाते हैं, उन्हें वापस बुलाने में कोई संकोच नहीं किया जाएगा। बिना किसी उद्देश्य के इधर-उधर घूमने वाले किसी भी व्यक्ति को तुरंत वापस बुला लिया जाएगा।''
उन्होंने कहा, ''मंत्रालय का मानना है कि हर 'एक्रीडिटेशन' (मान्यता प्राप्त कार्ड) महत्वपूर्ण है और यह केवल उन्हीं को मिलना चाहिए जो किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन में योगदान दे सकें।''
भारत के प्रशासकों को अक्सर इस बात के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है कि बड़े आयोजनों में दल के साथ बड़ी संख्या में जाने के बावजूद वे खिलाड़ियों की मदद के लिए मौजूद नहीं रहते। बहु-खेल प्रतियोगिताओं के दौरान अधिकारियों से 'लॉजिस्टिक्स', प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य प्रशासनिक कार्यों को संभालने की अपेक्षा की जाती है।
इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की भागीदारी काफी कम होगी क्योंकि इसमें केवल 10 खेल ही शामिल होंगे। इसके विपरीत एशियाई खेलों में 41 अलग-अलग खेल शामिल होंगे और 700 से अधिक खिलाड़ियों के दल के यात्रा करने की उम्मीद है।
अधिकारियों को यह चेतावनी तब दी गई है जब खेल सचिव हरि रंजन राव ने जनवरी में अहमदाबाद में एक सम्मेलन में एनएसएफ अधिकारियों से कहा था कि बहु-खेल आयोजनों को 'परिवार के साथ सैर' की तरह मानना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राव ने तल्ख लहजे में कहा था, ''अगर आप इसे रिश्तेदारों के साथ घूमने-फिरने की जगह समझते हैं, तो कृपया मत जाइए। हमें आपकी जरूरत नहीं है।''
मंत्रालय ने पहले से घोषित नीति को दोहराते हुए एनएसएफ को पारदर्शिता और खिलाड़ियों की संतुष्टि सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख प्रतियोगिताओं के चयन परीक्षणों की वीडियोग्राफी कराने का निर्देश दिया है। यह नीति एक वर्ष से अधिक समय से लागू है।
एक अन्य विश्वसनीय सूत्र ने बताया, ''अगर चयन संबंधी कोई शिकायत मंत्रालय तक पहुंचती है, तो केवल यही पूछा जाएगा कि क्या ट्रायल की वीडियोग्राफी की गई थी। यदि नहीं, तो ट्रायल को अमान्य माना जाएगा।''
उन्होंने कहा, ''नीति लागू है और एनएसएफ को इसका अक्षरशः पालन करने के लिए याद दिलाया गया है। खिलाड़ियों को पीड़ित महसूस नहीं होना चाहिए।''
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को यहां एनएसएफ के साथ एक समीक्षा बैठक में जोर दिया था कि उन्हें खिलाड़ी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
भाषा आनन्द नमिता
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