दिल्ली नगर निगम की अनुपलब्ध फाइल 'रहस्यमय तरीके से मिलने' पर सीआईसी ने जताया आश्चर्य
सुरेश
- 03 Feb 2026, 06:31 PM
- Updated: 06:31 PM
(मोहित सैनी)
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने एक आरटीआई अर्जी के जवाब में जिस फाइल के ''नहीं मिलने'' का दावा किया था, वह केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में मामला आने के बाद ''रहस्यमय तरीके से'' उपलब्ध हो गई, जिसपर आयोग ने आश्चर्य जताया।
यह मामला मॉडल टाउन क्षेत्र में एक अस्पताल के 'लेआउट' की मंजूरी से संबंधित दस्तावेजों के बारे में मांगी गई जानकारी से जुड़ा है।
शुरुआत में, एमसीडी के नगर नियोजन विभाग ने आवेदक को बताया कि फाइल ''उपलब्ध नहीं है'' और ''उसका कुछ अता-पता नहीं लग पा रहा।'' पहली अपील के दौरान भी यही दलील दी गई थी।
हालांकि, जब मामला केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) तक पहुंचा, तो अप्रत्याशित रूप से कुछ जानकारियां सामने आईं।
इस उलटफेर को देखते हुए, सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने पूछा कि सीआईसी में सुनवाई के नोटिस के बाद संबंधित फाइल ''रहस्यमय तरीके से'' कैसे उपलब्ध हो गई, जबकि संबद्ध कार्यालय के अभिलेखपाल ने पूर्व में दिये दो जवाबों में कहा था कि इसे पेश नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ''आयोग इस बिल्कुल ही विपरीत रुख को नजरअंदाज नहीं कर सकता, खासकर उस वक्त, जब अचानक वह (फाइल) मिल जाने का क्षण आया...।''
सीआईसी ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर की गई अर्जी पर अपनाये गये रुख की आलोचना करते हुए कहा, ''केवल यह कहना कि कोई फाइल नहीं मिल रही है, आरटीआई कानून लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) को उसकी वैधानिक जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं करता है।''
इसने चिंता जताई कि आधिकारिक जवाबों में पीआईओ का नाम और संपर्क नंबर जैसी बुनियादी जानकारी भी शामिल नहीं थी, और यह भी कहा कि इस तरह की चूक ''आरटीआई अधिनियम की भावना'' और बुनियादी प्रशासनिक पारदर्शिता के विपरीत है।
आयोग ने आगे यह भी टिप्पणी की कि सूचना को औपचारिक रूप से प्राप्त करने की प्रक्रिया अपनाने और आवेदक को उसकी प्रगति से अवगत कराने के बजाय केवल आंतरिक खोज 'मेमो' जारी करने से ऐसा प्रतीत होता है कि कार्यालय के भीतर क्या-क्या हो रहा है, इसकी जानकारी से अपीलकर्ता को जानबूझकर अंधेरे में रखा गया।
सीआईसी ने कड़े शब्दों में कहा, ''सूचना के खुलासे से बचने का स्पष्ट रूप से प्रयास किया गया था।'' सीआईसी ने आगाह किया कि यदि प्राधिकार अपनी सुविधानुसार यह दावा करे कि रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहे हैं और बाद में कार्यवाही आगे बढ़ने पर उन्हें पेश किया जाता है तो यह आरटीआई कानून के उद्देश्य को विफल करेगा।
सोमवार को जारी एक आदेश में, सीआईसी ने एमसीडी को चार सप्ताह के भीतर आवेदक को एक नया, बिंदुवार और पूर्ण उत्तर प्रदान करने का निर्देश दिया तथा पीआईओ को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए।
भाषा सुभाष सुरेश
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