आयुष्मान भारत ने रीढ़ की हड्डी की जटिल सर्जरी की सुलभता बढ़ायी, मरीजों पर व्यय का बोझ काफी घटाया
संतोष
- 03 Feb 2026, 08:01 PM
- Updated: 08:01 PM
चंडीगढ़, तीन फरवरी (भाषा) आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) ने रीढ़ की हड्डी की जटिल सर्जरी की सेवा सुलभ कराने की दिशा में उल्लेखनीय वृद्धि की है और आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों पर वित्तीय बोझ को कम किया है। चंडीगढ़ के स्नातोकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) के एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है।
पीजीआईएमईआर का 'उत्तर भारत में एक तृतीयक देखभाल केंद्र में रीढ़ की सर्जरी तक पहुंच पर आयुष्मान भारत का प्रभाव: एक सिंहावलोकन' विषयक अध्ययन 'जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑर्थोपेडिक्स एंड ट्रॉमा (2026)' में प्रकाशित हुआ था।
पीजीआईएमईआर के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग द्वारा किए गए इस अध्ययन में जनवरी 2023 से दिसंबर 2024 तक की गई रीढ़ की हड्डी की सर्जरी का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में रोगियों ने रीढ़ की हड्डी की स्व-वित्तपोषित सर्जरी से 'एबी-पीएमजेएवाई' के तहत वित्तपोषित सर्जरी की ओर रूख किया। यह आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों के लिए स्वास्थ्य लागत को कम करने में योजना की भूमिका को रेखांकित करता है, जिसमें महंगी, प्रत्यारोपण-प्रधान प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।
मंगलवार को यहां जारी एक बयान में, पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने कहा कि यह अध्ययन मजबूत संस्थागत क्षमता के साथ मिलकर सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाता है।
प्रोफेसर लाल ने कहा, ''यह अध्ययन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आयुष्मान भारत किस प्रकार वित्तीय बाधाओं को दूर करके उन्नत शल्य चिकित्सा देखभाल तक पहुंच को नया रूप दे रहा है, जिससे समाज के बड़े वर्ग पहले इससे वंचित रह जाते थे।''
उन्होंने कहा कि पीजीआईएमईआर में, अब भुगतान करने की क्षमता यह निर्धारित नहीं करती कि किसी मरीज को जटिल, जीवन-परिवर्तनकारी रीढ़ की सर्जरी मिलेगी या नहीं।
इस अध्ययन में रीढ़ की हड्डी की 410 सर्जरी का विश्लेषण किया गया। इनमें से 67.3 प्रतिशत (276 मामले) एबी-पीएमजेएवाई के तहत वित्त पोषित थे, जबकि 26.8 प्रतिशत (110 मामले) स्व-वित्तपोषित थे। एबी-पीएमजेएवाई का उपयोग 2023 के 58.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 73.5 प्रतिशत हो गया। इसी अवधि के दौरान, स्व-भुगतान वाली प्रक्रियाएं 37.8 प्रतिशत से घटकर 18.9 प्रतिशत रह गईं।
भाषा राजकुमार संतोष
संतोष
0302 2001 चंडीगढ़