रास में सत्ता पक्ष ने विकसित भारत की बात की, विपक्ष ने कहा कि सभी राज्यों से समान व्यवहार करें
अविनाश
- 03 Feb 2026, 06:26 PM
- Updated: 06:26 PM
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष ने जहां अपनी उपलब्धियों को विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्रयास बताया वहीं विपक्ष ने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' कहने के बजाय सरकार को बिना किसी भेदभाव के, राज्यों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर उच्च सदन में पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए वाईएसआरसीपी सदस्य एस निरंजन रेड्डी ने कहा कि सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप आज भारत आईटी तथा एआई के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह उपलब्धि देश के युवाओं को रोजगार भी दे रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत है लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि कौशल विकास के जरिये कमियों को दूर किया जाएगा।
कृषि नीति की जरूरत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी खेती से जुड़ी है तथा हमारी जनसंख्या भी अधिक है और हमें अधिक खाद्यान्न की जरूरत भी होगी।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के बीच खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाना बेहद जरूरी है और इसके लिए दीर्घकालिक कृषि नीति की जरूरत होगी।
रेड्डी ने कहा कि आज देश युवा आबादी का देश है लेकिन आने वाले समय में यह युवा आबादी बुजुर्ग होगी। ''हमें उस स्थिति के लिए आज से ही तैयारी करनी होगी।''
उन्होंने न्यायिक सुधारों की मांग करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में बहुत कुछ करना होगा ताकि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम हो और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
बीजू जनता दल की सुलता देव ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार वाले ओडिशा में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध बढ़े हैं। उन्होंने कहा ''हमने तो ऐसे ओडिशा की कभी कल्पना ही नहीं की थी।''
उन्होंने कहा ''विकसित भारत की बात की जाती है। यह कैसा विकसित भारत है? ओडिशा के आठ जिलों ने आज तक रेल लाइन नहीं देखी है। मेट्रो रेल लाइन की परियोजना राज्य सरकार ने बनाई लेकिन केंद्र ने उस पर कुछ नहीं किया। यह कैसा विकास है? आपके शासनकाल में ओडिशा पूरी तरह उपेक्षित है। विशेष राज्य के दर्जे की बात तो छोड़ ही दीजिये।''
उन्होंने मांग की कि सरकार को बिना किसी भेदभाव के, राज्यों के साथ समान व्यवहार कर उनके विकास पर ध्यान देना चाहिए।
नेशनल कांफ्रेंस के गुरविंदर सिंह ओबेराय ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में केंद्र और राज्यों के बेहतर संबंधों की बात की गई है लेकिन जम्मू कश्मीर के मामले में यह बात दूर-दूर तक नजर नहीं आती।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य हो चुके हैं लेकिन उसे पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। वहां के युवाओं को रोजगार चाहिए और सरकार इस दिशा में प्रयास करती नहीं दिखती।
आईयूएमएल के अब्दुल वहाब ने कहा ''देश में मुख्य मुद्दा रोजगार का है। मनरेगा ग्रामीणों को रोजगार का बेहतर माध्यम था लेकिन मनरेगा को सरकार ने खत्म कर दिया। सरकार कौशल विकास की बात करती है लेकिन बजट में कौशल विकास के लिए आवंटन संतोषजनक नहीं है।''
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तब सच हो सकेगा जब हर क्षेत्र में मजबूती के साथ कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बजट में केरल की पूरी तरह उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया।
आम आदमी पार्टी के विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि विकसित भारत तब ही संभव होगा जब हर किसान की समस्या दूर होगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा और हर बच्चे को शिक्षा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि जब सरकार 25 करोड़ लोगों के गरीबी रेखा से बाहर आने का दावा करती है तो उसे बताना चाहिए कि वह 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज कैसे दे रही है।
उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स मंचों ने लाखों लोगों को रोजगार दे रखा है, यह अच्छी बात है। ''देश में बड़ी संख्या में युवक बेरोजगार हैं।''
साहनी ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट बढ़ाने की मांग भी की। ''यह देख कर दुख होता है कि हमारे देश के युवा यूक्रेन जैसे देश में जा कर मेडिकल की पढ़ाई करते हैं।''
उन्होंने कहा कि दुनिया के सर्वाधिक बीस प्रदूषित शहरों में से 13 शहर भारत में हैं और यह विडंबना है कि सदन में इस मुद्दे पर चर्चा ही नहीं हो पाई।
साहनी ने कहा कि आबादी अधिक है हमारी, लेकिन हमारी समस्याएं भी तो अधिक हैं। ''समस्याओं के हल के लिए हम क्या कर रहे हैं।''
भाजपा के दीपक प्रकाश ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए इच्छा शक्ति होनी चाहिए और आज अगर नक्सलवाद अंत के करीब है तो इसका बहुत बड़ा कारण नरेन्द्र मोदी सरकार की इच्छा शक्ति भी है।
चर्चा में भाजपा की रमीलाबेन बेचारभाई बारा, रामभाई मोकरिया, महाराजा संजाओबा लेशंबा, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, बीजू जनता दल के सुभाशीष खुंटिया, निरंजन बिशी, टीएमसी (एम) के जी के वासन, मनोनीत उज्ज्वल देवराज निकम, कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, भाकपा के पीपी सुनीर, मनोनीत हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी भाग लिया।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश
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