बिहार सरकार ने पेश किया 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट, वृद्धि दर 14.9 प्रतिशत रहने का अनुमान
अजय
- 03 Feb 2026, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
पटना, तीन फरवरी (भाषा) बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया और दावा किया कि राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है तथा चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 14.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने केंद्र की ओर से बिहार को मिली "उदार सहायता" के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के "दूरदर्शी" नेतृत्व की सराहना की, जो "समावेशी विकास" हासिल करने पर केंद्रित है।
मंत्री ने सदन को बताया, "वर्ष 2026-27 के लिए बजट का आकार 3,47,589.78 करोड़ रुपये है, जो 2025-26 के 3,16,895.02 करोड़ रुपये की तुलना में 30,694.74 करोड़ रुपये अधिक है। राजकोषीय घाटा लगभग 39,400 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.99 प्रतिशत है।"
यादव ने कहा, "इस सदन की ओर से मैं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिनके नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है। पिछले वर्ष के केंद्रीय बजट में बिहार को कई सौगातें मिलीं, जिनमें नए हवाई अड्डे, मखाना बोर्ड और अन्य खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शामिल हैं। राज्य सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले राज्यों में रहा है और 2024-25 में इसकी वृद्धि दर लगभग 14.9 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। हमें आशा है कि शीघ्र ही हम देश के शीर्ष राज्यों में शामिल होंगे।"
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर संकेत करते हुए जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता ने पार्टी अध्यक्ष को "ईमान, ज्ञान, विज्ञान, अरमान और सम्मान"—इन पांच तत्वों—का प्रतीक बताया, जो "विकसित बिहार" की दिशा में "समावेशी" प्रगति और "न्याय के साथ विकास" सुनिश्चित कर रहे हैं।
मंत्री ने महिला सशक्तीकरण पर मुख्यमंत्री के विशेष जोर की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल में शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना इसका ताजा उदाहरण है, जिसे पिछले नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों से पहले लागू किया गया था।
यादव के अनुसार, "कुल 1.56 करोड़ महिलाओं को 10,000-10,000 रुपये दिए गए हैं और जिन्होंने इस राशि का उपयोग व्यवसाय शुरू करने में किया है, उन्हें शीघ्र ही दो लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता मिलेगी।" इस योजना को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की भारी जीत में निर्णायक माना जा रहा है।
बजट के मुताबिक, वार्षिक योजना परिव्यय लगभग 1.22 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें ग्रामीण विकास विभाग को 18.33 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक हिस्सा मिला है। इसके बाद शिक्षा (15.02 प्रतिशत), स्वास्थ्य (8.21 प्रतिशत), शहरी विकास एवं आवास (7.77 प्रतिशत), ग्रामीण कार्य (7.29 प्रतिशत) और सामाजिक कल्याण (6.86 प्रतिशत) का स्थान है।
अनुसूचित जाति विशेष घटक योजना के लिए 19,603.02 करोड़ रुपये और जनजातीय उप-योजना के लिए 1,648.41 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन राशियों को 'माइनर हेड' के तहत चिह्नित किया गया है, ताकि इन्हें केवल अनुसूचित जाति और जनजाति के लाभार्थियों पर ही खर्च किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के सामाजिक कल्याण के लिए 13,202.38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बजट में राज्य की वित्तीय स्थिति को भी सुदृढ़ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि 2024-25 में राजस्व घाटा जीएसडीपी का मात्र 0.04 प्रतिशत रहा, हालांकि राजकोषीय घाटा 4.16 प्रतिशत रहा, जो निर्धारित 3.0 प्रतिशत की सीमा से अधिक है।
मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि सरकार ने अगले पांच साल में राज्य की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है और तेज औद्योगिक विकास के लिए पांच लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्ष 2026-27 में राज्य की अपनी राजस्व प्राप्तियां 75,202.98 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जिसमें कर राजस्व का हिस्सा 65,800 करोड़ रुपये होगा।
भाषा कैलाश
रवि कांत अजय
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