बिहार सरकार ने नीट अभ्यर्थी की मौत के मामले की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की
नेत्रपाल
- 31 Jan 2026, 07:30 PM
- Updated: 07:30 PM
पटना, 31 जनवरी (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार ने पटना में नीट परीक्षा की तैयारी कर रही 18 वर्षीय एक छात्रा की हाल ही में हुई मौत के मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की है।
फिलहाल बिहार पुलिस का एक विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रहा है।
जहानाबाद की यह छात्रा इस महीने के शुरुआत में यहां चित्रगुप्त नगर में एक छात्रावास के कमरे में बेहोश मिली थी और कई दिन तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
उसके परिवार ने उसका यौन उत्पीड़न होने और अधिकारियों पर मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
चौधरी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत सरकार से पटना में नीट आकांक्षी की मौत के मामले (केस नंबर- 14/26) की जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया है। इस घटना का पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से खुलासा होना चाहिए।''
उपमुख्यमंत्री के पास गृह विभाग भी है।
राज्य के गृह विभाग ने दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करते हुए एक अधिसूचना भी जारी की। यह अधिनियम देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई के कामकाज से संबंधित है।
केंद्र सरकार का कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग इस संबंध में एक अधिसूचना जारी करेगा, जो राज्य से जुड़े मामले में सीबीआई जांच शुरू करने के लिए एक जरूरी शर्त है।
नियमानुसार, एजेंसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर किसी अपराध की जांच करने के लिए राज्य और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की पहले से मंजूरी जरूरी होती है, क्योंकि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है।
मृत छात्रा के माता-पिता ने शनिवार को आरोप लगाया कि बिहार पुलिस यौन उत्पीड़न की बात से इनकार करके और इसे आत्महत्या का मामला बताकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।
छात्रा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की आशंका को खारिज नहीं किया गया। यह निष्कर्ष पुलिस के इस शुरुआती दावे से अलग है कि मेडिकल रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज में यौन हमले की बात सामने नहीं आई। इस मामले में छात्रा के हॉस्टल के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है।
इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ''सीबीआई अब पटना पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर एक अलग मामला दर्ज कर सकती है। ब्यूरो के अधिकारी राज्य पुलिस द्वारा जुटाए गए सभी सबूत अपने हाथों में लेंगे तथा संदिग्धों, गिरफ्तार व्यक्ति, अस्पताल के कर्मचारियों, परिवार के सदस्यों और उन पुलिसकर्मियों के बयान भी रिकॉर्ड करेंगे, जिन्होंने शुरू में मामले की जांच की थी और इसे आत्महत्या का मामला बताया था।''
इस बीच, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्णय ''बड़ी-बड़ी बातें करने वाली राजग सरकार'' की विफलता को दर्शाता है, जो धरती और आसमान के किसी भी कोने से अपराधियों को पकड़कर लाने का ''दिन-रात दावा'' करती है।
यादव ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा के साथ हुए बलात्कार और हत्या को उजागर करने के बजाय, बिहार सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसका प्रशासनिक तंत्र भ्रष्ट, अक्षम, अकुशल और गैर-पेशेवर है, जो बलात्कार और हत्या के मामले को सुलझाने में भी असमर्थ है।''
उन्होंने कहा कि नवरुना कांड जैसे कई मामलों में, सीबीआई ने ''12-13 साल तक आरोपी को गिरफ्तार करने में विफल रहने'' के बाद ''जांच बंद कर दी।'' उन्होंने कहा कि ''इस मामले में भी ऐसा ही होने की आशंका है।''
राजग नेताओं पर निशाना साधते हुए यादव ने सवाल किया, ''चुनाव के दौरान 'जंगल राज, जंगल राज' के नारे लगाने वाले कहां हैं? बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सरकार एक बार फिर सुर्खियां बटोरकर ध्यान भटकाने की कोशिश करेगी?''
भाषा राजकुमार नेत्रपाल
नेत्रपाल
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