तमिलनाडु के नेताओं ने केंद्रीय बजट पर अलग-अलग राय जाहिर की
पारुल
- 01 Feb 2026, 09:06 PM
- Updated: 09:06 PM
चेन्नई, एक फरवरी (भाषा) तमिलनाडु के नेताओं ने राज्य की वित्तीय स्थिति और विकास पर केंद्रीय बजट के प्रभाव को लेकर रविवार को अलग-अलग राय जाहिर की। भाजपा और उसके सहयोगियों ने जहां बजट को राज्य के औद्योगिक ढांचे और अवसंरचना के विकास के लिए एक रोडमैप के रूप में सराहा, वहीं विपक्ष ने इसे कृषि समुदाय एवं उच्च प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए अवसर चूक जाना करार दिया।
भाजपा की वरिष्ठ नेता तमिलिसाई सौंदरराजन ने विशाल अवसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से तमिलनाडु को प्राथमिकता देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की।
उन्होंने संवाददाताओं के साथ बातचीत में 'दुर्लभ खनिज गलियारे' और चेन्नई को हैदराबाद और बेंगलुरु से जोड़ने वाली हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी के महत्व पर प्रकाश डाला।
सौंदरराजन ने कहा, ''प्रधानमंत्री उन लोगों की तरह नहीं हैं, जो चुनाव नजदीक आने पर ही योजनाओं की घोषणा करते हैं। उन्होंने लगातार धनराशि आवंटित की है, जिसमें तमिलनाडु के विकास के लिए 11 लाख करोड़ रुपये भी शामिल हैं।''
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आलोचनाओं का जवाब देते हुए सौंदरराजन ने दावा किया कि बजट समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाता है। उन्होंने इस सिलसिले में विशेष रूप से प्रत्येक जिले में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावासों की स्थापना और काजू एवं नारियल किसानों के लिए विशेष प्रोत्साहनों का जिक्र किया।
सौंदरराजन ने कहा, ''बतौर डॉक्टर मैं चिकित्सा पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करने तथा कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर करों में छूट से विशेष रूप से खुश हूं। यह युवाओं और भविष्य के लिए बजट है।''
पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने पूंजीगत व्यय 10 प्रतिशत बढ़ाकर 12.20 लाख करोड़ रुपये किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश भर में रोजगार और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने विशेष रूप से आदिचनल्लूर में एक सांस्कृतिक केंद्र को शामिल करने तथा पुलिकट झील और पोधिगई पहाड़ियों के लिए पर्यटन विकास परियोजनाओं की सराहना की।
हालांकि, रामदास ने राजस्व बंटवारे पर अफसोस के साथ कहा, ''कृषि के लिए आवंटन में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन यह निराशाजनक है कि केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार 41 प्रतिशत पर ही बना हुआ है। हम सरकार से इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का आग्रह करते हैं।''
वहीं, एमएनएम के संस्थापक कमल हासन ने केंद्र सरकार पर राज्य की महत्वपूर्ण विकास आवश्यकताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
हासन ने 'एक्स' पर लिखा, ''आर्थिक रूप से अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को केंद्रीय बजट में निरंतर समर्थन मिलना चाहिए, न कि केवल चुनाव पूर्व पुरस्कार। सौभाग्य से, तमिलनाडु की बारी 2026 में आएगी।''
भाषा
राजकुमार पारुल
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