भाजपा ने बीएमसी में ठाकरे बंधुओं, पुणे महानगरपालिका चुनावों में पवार परिवार को दी शिकस्त
सुभाष पवनेश
- 16 Jan 2026, 10:09 PM
- Updated: 10:09 PM
मुंबई, 16 जनवरी (भाषा) अविभाजित शिवसेना के लगभग तीन दशक के वर्चस्व को तोड़ते हुए, भाजपा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में शुक्रवार को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और पुणे में भी विजयी रही।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने शाम को दक्षिण मुंबई में उत्साहित भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन 29 नगर निकायों में से 25 में सत्ता में आने वाला है।
बीएमसी सहित इन सभी नगर निकायों में 15 जनवरी को वोट डाले गए थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा नीत गठबंधन के शानदार जीत की ओर बढ़ने को लेकर राज्य की जनता का आभार जताया और कहा कि राज्य के लोगों ने राजग के जनहितकारी सुशासन के एजेंडे को आशीर्वाद दिया है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘महाराष्ट्र का आभार! राज्य की उत्साही जनता ने राजग के जनहितकारी सुशासन के एजेंडे को आशीर्वाद दिया है।’’
227 सदस्यीय बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है। देश के सबसे धनी नगर निकाय बीएमसी का 2025-26 का बजट 74,427 करोड़ रुपये है।
मुंबई और 28 अन्य नगर निकायों के चुनावों के लिए बृहस्पतिवार को हुए मतदान के एक दिन बाद मतगणना शुक्रवार को हुई। इन चुनावों में 54.77 प्रतिशत मतदान हुआ था।
राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी तक सभी परिणामों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। एक अधिकारी ने बताया कि अंतिम परिणाम देर रात तक घोषित किए जा सकते हैं।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के शानदार प्रदर्शन के साथ, भाजपा अब बीएमसी में शासन की बागडोर संभालने की ओर अग्रसर है।
इस बीच, भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि महायुति विचार-विमर्श के बाद बीएमसी के महापौर को चुनेगी।
उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘महायुति अपने महापौर को चुनेगी। हम विचार-विमर्श करेंगे और फिर अंतिम निर्णय लेंगे।’’
बीएमसी की सत्ता के लिए हुए इस मुकाबले में ठाकरे बंधु (उद्धव और राज ठाकरे) दो दशकों बाद फिर से एकजुट हुए, लेकिन अब तक घोषित परिणामों से संकेत मिलता है कि उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
पुणे और पड़ोसी पिंपरी-चिंचवड नगर निकाय चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) गठबंधन को पछाड़ते हुए भाजपा भारी जीत की ओर अग्रसर है।
जीत का सेहरा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सिर बांधा जा रहा है, क्योंकि उनके नेतृत्व में भाजपा, 2017 के बीएमसी चुनावों में हासिल की गई 82 सीटों से भी आगे निकल गई है।
भाजपा के 'मिशन मुंबई' की सफलता ने अब उसे वित्तीय राजधानी में प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में मजबूती से स्थापित कर दिया है।
इस परिणाम से मुंबई की सत्ता संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। वर्षों से, बीएमसी को ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का अजेय गढ़ माना जाता था।
भाजपा की जीत के साथ, मुंबई की राजनीति का विमर्श अब 'मराठी अस्मिता' से हटकर भाजपा के 'विकास' और शहरी अवसंरचना के एजेंडे के समर्थन में जनादेश की ओर मुड़ गया है।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने कहा कि बीएमसी चुनावों में भाजपा और शिवसेना का दमदार प्रदर्शन चुनाव प्रचार के दौरान उनके हिंदुत्व के एजेंडे को स्पष्ट जनादेश है।
राणे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘जो हिंदू की बात करेगा, वो महाराष्ट्र पर राज करेगा।’’
वर्ष 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के आरोपी श्रीकांत पंगारकर ने जालना नगर निकाय में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में (पार्षद) चुनाव में जीत हासिल की।
मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गृह नगर (नागपुर) में, नागपुर महानगरपालिका के लिए हुए चुनाव में मतगणना के रुझान और परिणाम 2017 के परिणामों के लगभग दोहराव का संकेत दे रहे हैं। वहां कांग्रेस अपनी पैठ बनाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है।
नागपुर की 151 सदस्यीय महानगरपालिका के लिए हुए चुनाव में भाजपा 2017 के 108 सीट के आंकड़े को पार करने की राह पर अग्रसर है।
वहीं, कांग्रेस ने 70 सदस्यीय लातूर महानगरपालिका के लिए हुए चुनाव में 40 से अधिक सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया, जबकि भाजपा दूसरे स्थान पर रही।
चुनावों से पहले, उद्धव और राज ठाकरे पिछले महीने फिर से एक साथ आ गए, जबकि राकांपा के दोनों गुटों ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड में स्थानीय स्तर पर गठजोड़ किया।
बीएमसी चुनावों के लिए मुंबई में प्रचार करते हुए भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने कहा था कि यह शहर सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शहर है। वहीं, इसके जवाब में मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने तमिलनाडु के भाजपा नेता के लिए ‘रसमलाई’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
बीएमसी चुनावों में भाजपा-शिवसेना की आक्रामक बढ़त दर्शाने वाले रुझानों के बीच, शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने कहा कि असली तस्वीर आधी रात को ही सामने आएगी जब सभी वोटों की गिनती के बाद मौजूदा संकेत बदल जाएंगे।
शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस का दबदबा टूट गया है, और अब उसके बीएमसी की 227 सीटों में से सिर्फ 10 प्रतिशत सीटें ही जीतने की उम्मीद है।
असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नगर निकाय चुनावों में अप्रत्याशित रूप से मजबूत होकर उभरी है और राज्य भर के मुस्लिम बहुल वार्डों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है।
एआईएमआईएम के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा कि पार्टी राज्य भर में 100 सीटों पर जीत हासिल करने वाली है और उसे मुंबई में कुछ सीटें हासिल करने के अलावा छत्रपति संभाजीनगर, धुले, अमरावती, जालना, मालेगांव और परभणी में मजबूत समर्थन मिला है।
कई वर्षों के अंतराल के बाद 15 जनवरी को 29 नगर निकायों के चुनाव हुए, जिनमें से ज्यादातर का कार्यकाल 2020 और 2023 के बीच समाप्त हुआ था। इनमें से नौ नगर निकाय मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में स्थित हैं, जो देश में सर्वाधिक शहरीकरण वाला क्षेत्र है।
बृहस्पतिवार को बीएमसी और छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नागपुर, सोलापुर, अमरावती, अकोला, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़, पुणे, उल्हासनगर, ठाणे, चंद्रपुर, परभणी नगर निकायों में मतदान हुआ था।
इसके अलावा, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, पनवेल, भिवंडी-निजामपुर, लातूर, मालेगांव, सांगली-मिराज-कुपवाड, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले, जालना और इचलकरंजी नगर निकायों के लिए भी वोट डाले गए थे।
भाषा सुभाष