तमिलनाडु: एकल पीठ ने ‘जन नायकन’ को सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया, खंडपीठ ने रोक लगाई
जितेंद्र अविनाश
- 09 Jan 2026, 09:15 PM
- Updated: 09:15 PM
चेन्नई, नौ जनवरी (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी, जिसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को अभिनेता विजय अभिनीत फिल्म ‘जन नायकन’ को सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति पीटी आशा ने मामले को समीक्षा समिति को भेजने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका को रद्द करते हुए फिल्म ‘जन नायकन’ को प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था, जिसके कुछ घंटों बाद खंडपीठ का यह आदेश आया।
मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने बोर्ड द्वारा दायर अपील पर एकल न्यायाधीश के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति आशा ने फिल्म निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि एक बार बोर्ड द्वारा प्रमाणपत्र जारी करने का निर्णय लेने के बाद अध्यक्ष के पास मामले को समीक्षा समिति के पास भेजने का कोई अधिकार नहीं है।
फिल्म बोर्ड ने तुरंत इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की।
याचिका में बोर्ड अधिकारियों को सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष मुकदमे की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरेशन और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित हुए) ने अपील के आधार को स्पष्ट किया।
मेहता ने दलील दी कि बोर्ड के अध्यक्ष को प्रमाणपत्र जारी करने के निर्णय की समीक्षा करनी चाहिए और सेना के संदर्भों व धर्म से संबंधित भावनाओं के आधार पर मामले को समीक्षा समिति के पास भेजना चाहिए।
सुंदरेशन ने कहा कि एकल न्यायाधीश ने सेंसर प्रमाणपत्र तत्काल जारी करने का आदेश दिया और प्रतिवाद दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया।
याचिकाकर्ता फिल्म निर्माता कंपनी ने छह जनवरी को याचिका दायर की, फिल्म बोर्ड ने सात जनवरी को रिकॉर्ड प्रस्तुत किए और एकल न्यायाधीश ने नौ जनवरी की सुबह आदेश जारी किया।
बोर्ड द्वारा छह जनवरी को फिल्म निर्माता को भेजे गये पत्र में सूचित किया गया था कि मामला समीक्षा समिति को भेजा गया है, को चुनौती नहीं दी गयी थी लेकिन एकल न्यायाधीश ने पत्र को रद्द कर दिया व उपरोक्त निर्देश दिया।
मेहता ने कहा कि एकल न्यायाधीश ने बोर्ड को जवाब दाखिल करने का पर्याप्त अवसर दिए बिना ही फिल्म निर्माता की याचिका स्वीकार कर ली।
प्रोडक्शन हाउस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने बताया कि छह जनवरी का पत्र याचिका दायर होने के बाद निर्माता को भेजा गया था।
जब न्यायाधीश ने पूछा कि पत्र कब भेजा गया था, तो सुंदरेशन ने कहा कि यह याचिका दायर होने से पहले ही भेज दिया गया था।
रोहतगी ने अदालत को बताया कि समिति के अधिकांश सदस्यों ने सेंसर प्रमाणपत्र देने का फैसला किया तो समिति के एक सदस्य की शिकायत के आधार पर मामले को समीक्षा समिति को भेजा गया था।
उन्होंने कहा कि मामला अत्यावश्यक था इसलिए निर्माता ने छह जनवरी को याचिका दायर की क्योंकि फिल्म नौ जनवरी को रिलीज होने वाली थी।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मुझे खेद है। क्या सुंदरेशन को अपना जवाब दाखिल करने का अधिकार नहीं है? आपको इंतजार करना चाहिए था। बिना सेंसर प्रमाणपत्र के आप आगे कैसे बढ़ सकते हैं?”
पीठ ने आदेश में कहा कि याचिका छह जनवरी को दायर की गई थी और बोर्ड को अपना जवाब दाखिल करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था।
पीठ ने फिल्म के निर्माता को नोटिस जारी करने का आदेश दिया तथा मामले की सुनवाई 21 जनवरी के लिए स्थगित कर दी।
भाषा जितेंद्र