अमित मालवीय ने बांग्लादेश में अशांति का मुद्दा उठाया और ममता को चेताया, टीएमसी का पलटवार
जितेंद्र देवेंद्र
- 19 Dec 2025, 09:02 PM
- Updated: 09:02 PM
कोलकाता, 19 दिसंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को दावा किया कि बांग्लादेश में मीडिया संस्थानों, पत्रकारों और सांस्कृतिक केंद्रों पर हुए हालिया हमले ‘इस्लामी दबाव’ में किए गए।
पार्टी ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ‘चरमपंथ के तुष्टीकरण’ से समाज अस्थिरता की ओर बढ़ सकता है।
भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि यह स्थिति एक चेतावनी है और उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी सरकार के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल ‘खतरनाक रास्ते’ पर है।
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मालवीय की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए भाजपा नेता पर पश्चिम बंगाल का अपमान करने और भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
मालवीय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “कल (बृहस्पतिवार) रात, ढाका में इस्लामी भीड़ ने छायानाट भवन में तोड़फोड़ की, जो एक ऐतिहासिक संस्थान और बंगाली कला एवं संस्कृति का केंद्र है।”
उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह स्पष्ट है। इस्लामी दबाव और धमकियों के तहत मीडिया संस्थानों, पत्रकारों और सांस्कृतिक केंद्रों पर हमले किए जा रहे हैं। यह एक चेतावनी है।”
भाजपा नेता ने कहा कि जब चरमपंथ को बढ़ावा दिया जाता है और अराजकता को सामान्य मान लिया जाता है तो समाज इसी तरह बिखर जाता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल की स्थिति “बेहद चिंताजनक” है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की शुरुआत में होने हैं।
टीएमसी ने मालवीय के ‘भड़काऊ बयानों’ की कड़ी निंदा की।
टीएमसी के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा, “ अमित मालवीय का यह पोस्ट खतरनाक है। वे बांग्लादेश की स्थिति की तुलना पश्चिम बंगाल से कर रहे हैं। यह न केवल हमारे राज्य का अपमान है, बल्कि स्पष्ट रूप से उकसावा भी है। पुलिस को इस व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए और तत्काल उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।”
घोष ने बांग्लादेश की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि पार्टी इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज कर रही है क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय मामला है। उन्होंने कहा, “हमारा नेतृत्व घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। राष्ट्रीय हित में, हम भारत सरकार के रुख का समर्थन करते हैं।”
घोष ने कहा, “बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, भारतीयों और मीडियाकर्मियों को उचित सुरक्षा मिलनी चाहिए। कुछ अमानवीय खबरें और वीडियो आ रहे हैं और यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन सी बात सच है।”
उन्होंने केंद्र सरकार से उचित कदम उठाने और बयान जारी करने का आग्रह किया।
इससे पहले भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बांग्लादेश की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पड़ोसी देश में ‘घटनाक्रम के पीछे कट्टरपंथियों का हाथ है’।
उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि स्थिति पर उनका नियंत्रण है।
भट्टाचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय स्थिति से उचित ढंग से निपट रहे हैं तथा वे उसी अनुरूप जवाब देंगे।
राज्यसभा सदस्य ने संवाददाता सम्मेलन में बांग्लादेश की स्थिति से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, “बांग्लादेश में कट्टरपंथ और चरमपंथ कैंसर की तरह फैल रहा है। सभी सही सोच वाले लोगों को इस खतरे से लड़ने के लिए एकजुट होना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “1980 के दशक से ही बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें अपनी जड़ें फैला रही हैं। यह हदें पार कर चुकी हैं। जैसा कि कल रात देखा गया, स्वतंत्र विचारक और उदारवादी व्यक्ति भी हमलों का शिकार हो रहे हैं। पूरी दुनिया कट्टरपंथ का खामियाजा भुगत रही है। एक राष्ट्रवादी सरकार और पार्टी ही इन चुनौतियों का सामना कर सकती है।”
जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मृत्यु के बाद शुक्रवार को बांग्लादेश में तनाव फैल गया, जिस वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन, हिंसा और तोड़फोड़ हुई।
हालांकि, सुबह हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई लेकिन प्रदर्शनकारियों को बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के आवास, 32 धानमंडी की पहले से ही ध्वस्त इमारत में तोड़फोड़ करते देखा गया।
मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस द्वारा राष्ट्र को संबोधित एक टेलीविजन भाषण में इंकलाब मंच के नेता हादी की मौत की पुष्टि किये जाने के बाद बृहस्पतिवार रात को चटगांव स्थित भारतीय सहायक उच्चायुक्त के आवास पर पथराव समेत देश के विभिन्न हिस्सों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुई।
भाषा जितेंद्र