नोटिस के खिलाफ केजरीवाल, सिसोदिया की याचिका ‘समय-पूर्व’ दायर की गई-विधानसभा सचिवालय
देवेंद्र रंजन
- 19 Dec 2025, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी कि ‘फांसी घर’ मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति द्वारा जारी समन को चुनौती देने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की याचिका ‘‘समय-पूर्व’’ दायर की गई है।
याचिका का विरोध करते हुए सचिवालय के वकील ने कहा कि विशेषाधिकार समिति केवल ‘फांसी घर’ के अस्तित्व से संबंधित तथ्यों की पड़ताल कर रही थी और आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ विशेषाधिकार हनन या सदन की अवमानना का कोई आरोप नहीं लगाया गया है।
वकील ने न्यायमूर्ति सचिन दत्ता के समक्ष यह दलील दी कि ‘आप’ नेताओं का समिति के समक्ष उपस्थित न होना समिति की कार्यवाही को आगे बढ़ने से रोक रहा है, जो सदन की अवमानना के बराबर है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह रिट याचिका पूरी तरह से समय से पूर्व दायर की गई है। समिति को अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है।’’
विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने दलील दी, “याचिकाकर्ताओं (केजरीवाल और सिसोदिया) के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का कोई आरोप नहीं है। समिति के समक्ष उनकी अनुपस्थिति सदन की अवमानना के बराबर है, इसलिए यह एक बहुत ही गंभीर मामला है...… किसी के जीवन या स्वतंत्रता को किसी भी तरह से खतरा नहीं है।’’
अदालत ने ‘आप’ के नेताओं के वकीलों द्वारा प्रस्तुत प्रतिवादों की सुनवाई के लिए मामले को आठ जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया।
दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ‘आप’ की पिछली सरकार के ‘फांसी घर’ संबंधी दावों की पड़ताल कर रही है। समिति ने ‘आप’ के संयोजक केजरीवाल और मनीष सिसोदिया, राम निवास गोयल और राखी बिड़ला समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को तलब किया और उन्हें 13 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा। इसके बाद, उन्हें 20 नवंबर को पेश होने के लिए कहा गया था।
केजरीवाल और सिसोदिया ने समन को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है। उनका कहना है कि नोटिस से पता चलता है कि कार्यवाही न तो किसी शिकायत या रिपोर्ट पर आधारित है और न ही यह विशेषाधिकार हनन या अवमानना के किसी प्रस्ताव का संदर्भ है।
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