शुभेंदु ने मेस्सी के कार्यक्रम में हुए विवाद के लिए बंगाल के दो मंत्रियों की गिरफ्तारी की मांग की
तान्या पवनेश
- 17 Dec 2025, 05:52 PM
- Updated: 05:52 PM
कोलकाता, 17 दिसंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों अरूप बिस्वास और सुजीत बोस की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि 13 दिसंबर को साल्ट लेक स्टेडियम में अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी की मौजूदगी वाले बहुप्रचारित फुटबॉल आयोजन के दौरान, जहां दर्शकों की व्यापक तोड़फोड़ देखने को मिली, इन दोनों मंत्रियों ने अनावश्यक रूप से सुर्खियां बटोरीं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) अधिकारी ने लगभग 30 भाजपा विधायकों के साथ औचक दौरा कर वहां हुए नुकसान का जायजा लेने की कोशिश की, लेकिन प्रवेश द्वार बंद होने के कारण वह स्टेडियम में प्रवेश नहीं कर पाए।
इसके बाद उन्होंने स्टेडियम के बगल में स्थित बिधाननगर पुलिस आयुक्त के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया और तोड़फोड़ व हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किए गए सभी छह दर्शकों की रिहाई की मांग की।
अधिकारी ने कहा, "मेस्सी के कार्यक्रम के टिकटों की बिक्री में घोटाला हुआ जिसकी रकम करोड़ों में बताई जा रही है और तृणमूल कांग्रेस को उसके मंत्रियों, अरूप बिस्वास और सुजीत बोस के जरिए यह रकम मिली। स्टेडियम में मची अफरा-तफरी, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष पश्चिम बंगाल को शर्मिंदा किया, इसलिए फैली क्योंकि ये मंत्री और उनके परिवार के सदस्य फुटबॉल सितारों के आसपास एकत्र होकर सेल्फी लेने में व्यस्त थे। मेरी मांग है कि इन दोनों मंत्रियों को गिरफ्तार किया जाए।"
विपक्ष के नेता ने यह भी मांग की कि कार्यक्रम के टिकटों का मूल्य उन दर्शकों को तुरंत वापस किया जाए, जो गैलरी में प्रवेश के लिए भारी रकम चुकाने के बावजूद अपने पसंदीदा फुटबॉल खिलाड़ी की एक झलक पाने से वंचित रह गए।
अधिकारी ने दो अन्य अधिवक्ताओं के साथ मिलकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर इस घटना की शर्मनाक विफलता में न्यायिक हस्तक्षेप का आग्रह किया गया है और राज्य सरकार के अधिकारियों से मुक्त एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की भी प्रार्थना की गई है ताकि अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी दोनों का पता लगाया जा सके।
इस मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा किए जाने की संभावना है।
स्टेडियम के एक 'रैंप' तक पहुंचने में सफल रहे अधिकारी और उनके सहयोगियों ने परिसर के भीतर पड़े बिना बिके बोतलबंद पानी और पेय पदार्थों के ढेर की ओर इशारा किया और आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने प्रतिबंधित वस्तुओं को परिसर में लाने की अनुमति देने के बदले विक्रेताओं से "30 लाख रुपये कमीशन के रूप में" लिए थे।
बाद में उन्होंने पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर 'चोर, चोर' के नारे भी लगाए।
अधिकारी ने कहा कि इस सिलसिले में गिरफ्तार किए गए फुटबॉल प्रशंसकों को कानूनी सहायता दी जाएगी और भाजपा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कराने के लिए अदालत का रुख भी करेगी।
इससे पहले एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह न्याय का मखौल है, क्योंकि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे वो लोग हैं जिनके साथ भारी कीमत पर टिकट खरीदने के बाद धोखाधड़ी हुई।
उन्होंने आरोप लगाया, “इस गड़बड़ी के लिए पूरी तृणमूल कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है।”
अधिकारी के आरोपों का जवाब देते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि भाजपा नेता को "सड़कों पर नाटक करने के बजाय" विधानसभा में इस मुद्दे को उठाना चाहिए।
चक्रवर्ती ने कहा, "अगर अधिकारी व्यवस्था में सुधार को लेकर इतने उत्सुक हैं, तो उन्हें सारदा और नारदा घोटालों की स्वतंत्र जांच के लिए एक समिति गठित करने की मांग भी करनी चाहिए, जिनमें वे खुद भी शामिल थे। मुझे इस बात पर गंभीर संदेह है कि वे कभी यह मांग उठाएंगे।"
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साल्ट लेक स्टेडियम में लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम के कथित कुप्रबंधन के लिए मंगलवार को खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, वहीं राज्य सरकार ने डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और एक पुलिस उपायुक्त को निलंबित कर दिया।
इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ माकपा नेता बिमान बोस ने कहा कि बिस्वास से उनके पास मौजूद विभागों में से एक से केवल इस्तीफा स्वीकार कर लेना यह सुनिश्चित नहीं करता कि वह जांच को प्रभावित नहीं कर पाएंगे।
बोस ने कहा, "बिस्वास सिर्फ राज्य के खेल मंत्री ही नहीं थे। वे राज्य के विद्युत विभाग के प्रभारी मंत्री भी हैं, जिसका बजट खेल विभाग के बजट से बिल्कुल अलग है। उन्हें भले ही अस्थायी रूप से खेल विभाग से हटा दिया गया हो, लेकिन वे अभी भी विद्युत मंत्री हैं और इसी वजह से वे जांच को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।"
शनिवार को मेस्सी के 'जीओएटी' दौरे के कोलकाता चरण के दौरान फुटबॉल प्रशंसकों ने स्टेडियम के अंदर जमकर उत्पात मचाया। उनका आरोप था कि वीआईपी और अन्य अधिकारियों से घिरे होने के कारण उन्हें फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी की एक झलक भी देखने को नहीं मिली।
भाषा तान्या