कर्मचारी एआई का उपयोग करने के लिए उत्सुक, आत्मविश्वास और मार्गदर्शन का आभाव: रिपोर्ट
योगेश अजय
- 18 Nov 2025, 07:39 PM
- Updated: 07:39 PM
नयी दिल्ली, 18 नवंबर (भाषा) भारत में कर्मचारी कार्यस्थल पर कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग में गहरी रुचि दिखा रहे हैं और लगभग तीन-चौथाई कर्मचारी पहले से ही अपनी भूमिकाओं में इसका लाभ उठा रहे हैं, लेकिन उनमें व्यक्तिगत आत्मविश्वास और संगठन की ओर से स्पष्ट मार्गदर्शन की कमी है। यूडेमी की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
भारत में 18 से 70 वर्ष की आयु के 1,000 इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच किए गए यूगोव सर्वेक्षण पर आधारित इस अध्ययन में एआई के प्रति कर्मचारियों के उत्साह और उनके संगठनों द्वारा कौशल उन्नयन के लिए दिए जाने वाले समर्थन के बीच महत्वपूर्ण अंतर को उजागर किया गया है।
भारतीय कर्मचारियों का एआई के प्रति मिश्रित दृष्टिकोण है, 32 प्रतिशत लोग अपने जीवन में लाभ और जोखिम दोनों देखते हैं, 45 प्रतिशत को उम्मीद है कि इससे उनके जीवन में सुधार आएगा तथा 34 प्रतिशत का मानना है कि इससे समाज को लाभ होगा।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारत में 10 में से केवल तीन पेशेवर ही अपने एआई कौशल में आत्मविश्वास महसूस करते हैं और 61 प्रतिशत पेशेवर दृढ़ता से या कुछ हद तक इस बात से सहमत हैं कि उनके नियोक्ता उनके दैनिक कार्यों में एआई के उपयोग के स्पष्ट तरीके नहीं बताते हैं। इस चुनौती को और भी जटिल बनाते हुए भारत में अधिकतर कर्मचारी मानते हैं कि एआई कौशल हासिल करना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है, जो सक्षमता के क्षेत्र में बढ़ती खाई को उजागर करता है।’’
इसके अलावा, शोध से यह भी पता चलता है कि रोज़गार योग्यता के मामले में कर्मचारियों और नियुक्ति प्रबंधकों के बीच क्या अंतर है। जहां 67 प्रतिशत भारतीय कर्मचारियों का मानना है कि शुरुआती स्तर की नौकरियों के लिए कॉलेज की डिग्री आवश्यक है, वहीं केवल 32 प्रतिशत भर्ती प्रबंधक डिग्री को प्राथमिकता देते हैं और इसके बजाय प्रदर्शित किए गए कौशल को अधिक महत्व देते हैं।
यूडेमी के अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ह्यूगो सर्राजिन ने कहा, "...एआई की ट्रेन स्टेशन पर है, लेकिन लोग उसमें चढ़ने से हिचकिचा रहे हैं, यात्रा को लेकर अनिश्चय है और आगे क्या होने वाला है, इसके लिए तैयार नहीं हैं। जो संगठन कर्मचारियों को इन कमज़ोरियों से उबरने में मदद करेंगे, उन्हें प्रतिस्पर्धा में भारी बढ़त मिलेगी, ताकि जब एआई का वास्तविक प्रभाव पड़े, तो उन्हें स्टेशन पर इंतजार न करना पड़े।"
भाषा योगेश