‘पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना’: भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने आप, तृणमूल पर साधा निशाना
आशीष माधव
- 30 Dec 2025, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
कोलकाता, 30 दिसंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल की मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारा के ग्रंथियों के लिए ‘पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना’ शुरू करने की घोषणा की आलोचना की और इसकी तुलना पश्चिम बंगाल में पुजारियों को दिए जाने वाले मासिक भत्ते से की।
इस कदम की आलोचना करते हुए प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘आम आदमी पार्टी (दिल्ली में) और तृणमूल कांग्रेस (पश्चिम बंगाल में) दोनों को गरीबों की सच्ची आर्थिक प्रगति में कोई दिलचस्पी नहीं है। वे केवल दिखावे पर ध्यान केंद्रित करते हैं, समग्र विकास पर नहीं।’’
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल ने पुजारियों के लिए 2020 में भत्ते की शुरुआत से पहले, 2012 में इमामों के लिए मासिक भत्ता शुरू किया था, जिसे अगस्त 2023 में 500 रुपये बढ़ा दिया गया था।
भट्टाचार्य ने कहा कि इन उपायों के बावजूद, पश्चिम बंगाल में पुजारियों, इमामों और ग्रंथियों की आर्थिक स्थिति खराब बनी हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘न तो आप और न ही तृणमूल कांग्रेस की वास्तव में गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने में दिलचस्पी है। उनका केवल धार्मिक आधार पर वोट हासिल करने पर ध्यान है। भाजपा एकमात्र पार्टी है जो समावेशी विकास के लिए काम कर रही है।’’
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश मजूमदार ने सामाजिक कल्याण के प्रति अपनी पार्टी के दृष्टिकोण का बचाव करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की, जिसमें महिला सशक्तिकरण योजनाएं भी शामिल हैं, जिनकी भाजपा सरकारों ने मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में नकल की है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को पश्चिम बंगाल में पराजय का सामना करना पड़ा और दिल्ली में भी उसे असफलता का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘वे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली जनकल्याणकारी सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं की आलोचना करने के लिए बहाने बना रहे हैं।’’
केजरीवाल ने घोषणा की है कि अगर उनकी पार्टी दिल्ली में फिर से सत्ता में आती है तो मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को 18,000 रुपये मासिक भत्ता देने के लिए ‘पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना’ शुरू की जाएगी।
भाषा आशीष