कोविड-19, आर्थिक कठिनाइयों को मात देकर सीए बना तेलंगाना का युवा
पारुल अविनाश
- 30 Dec 2025, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
हैदराबाद, 30 दिसंबर (भाषा) तेलंगाना के 22 वर्षीय साई दिनेश के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की फाइनल परीक्षा में सफलता पाना अपने सपने के साकार होने जैसा था। साई ने अपने माता-पिता की उम्मीदों पर खरे उतरते हुए न सिर्फ यह मुश्किल परीक्षा उत्तीर्ण की, बल्कि 40वीं रैंक भी हासिल की।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने हाल ही में सीए की फाइनल परीक्षा के नतीजे घोषित किए। परिवार की खराब माली हालत और कोरोनाकाल में सेहत संबंधी चुनौतियों के बावजूद साई इस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने में सफल रहे। वह अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता, बहन और उस फर्म को देते हैं, जहां उन्होंने अपनी ‘आर्टिकलशिप’ पूरी की।
साई ने बताया कि राजमिस्त्री के रूप में शुरुआत करने वाले उनके पिता एक छोटे निर्माण ठेकेदार हैं, लेकिन उन्होंने वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद अपने बेटे के सपनों को अटूट समर्थन प्रदान किया।
साई ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मेरे पिता का सपना था कि वह पढ़-लिखकर ऊंचा मुकाम हासिल करें, लेकिन कुछ कारणों से वह इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। उन्हें राजमिस्त्री सहित अन्य छोटे-मोटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसलिए, जब मैंने उनसे कहा कि मैं सीए करूंगा, तो उन्होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि वह मुझे आर्थिक रूप से समर्थन देने की पूरी कोशिश करेंगे।”
साई ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उनकी गृहिणी मां ने भी उन्हें खूब प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा, “दोनों को मुझ पर पूरा भरोसा था। उन्हें उम्मीद थी कि मैं सीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर लूंगा। मैं उनकी उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करना चाहता था और भगवान का शुक्र है कि मुझे अच्छी रैंक मिली।”
साई अपने माता-पिता को आरामदायक जिंदगी देना चाहते हैं। वह कहते हैं, “उन्हें आरामदायक जीवन देना ही मेरा लक्ष्य है। वास्तव में मेरी पीड़ा कोई मायने नहीं रखती है... मैं अब बस यही चाहता हूं कि वे आराम से रहें।”
साई ने बताया कि उनकी बड़ी बहन चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की ख्वाहिश रखती थी। हालांकि, उसे आईआईआईटी बसारा में दाखिला मिल गया और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब वह अच्छी नौकरी कर रही है।
साई ने कहा कि सीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर एक तरह से उसने अपनी बहन का सपना पूरा किया है। उन्होंने कहा कि सीए की परीक्षा पास करना उनका लक्ष्य था, लेकिन रैंक हासिल करना उनके लिए कुछ हद तक अप्रत्याशित था।
साई के मुताबिक, उन्होंने फाइनल परीक्षा की तैयारी के लिए पांच महीनों तक रोजाना 12 से 14 घंटे पढ़ाई की। उन्होंने कहा, “यह मुश्किल था, लेकिन जब आप (अच्छी रैंक हासिल कर) सफल होते हैं, तो आपको बहुत अच्छा महसूस होता है।”
साई के अनुसार, अब उनका पूरा ध्यान रैंक धारकों के लिए होने वाले प्लेसमेंट प्रोग्राम में अच्छा प्रदर्शन करने पर है।
भाषा पारुल