उच्चतम न्यायालय ने एनसीपीसीआर से पूछा, सिर्फ मदरसों को लेकर ही चिंता क्यों?
नोमान माधव
- 22 Oct 2024, 09:42 PM
- Updated: 09:42 PM
नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से पूछा कि वह सिर्फ मदरसों को लेकर चिंतित क्यों है?
इससे पहले बाल अधिकार आयोग ने कहा था कि मदरसों के छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई नहीं कर पाएंगे।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए यह टिप्पणी की।
उच्च न्यायालय ने मदरसा संबंधी 2004 के उत्तर प्रदेश कानून को इस आधार पर असंवैधानिक करार दिया था कि यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
एनसीपीसीआर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता स्वरूपमा चतुर्वेदी ने कहा कि मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा के विकल्प के रूप में नहीं देखा जा सकता। चतुर्वेदी ने कहा कि इसके अलावा, मदरसा छात्रों को नौसेना, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में करियर बनाने का अवसर नहीं मिलेगा।
प्रधान न्यायाधीश ने पूछा, “क्या एनसीपीसीआर ने सभी समुदायों के लिए कोई निर्देश जारी किया है कि आप बच्चों को अपने धार्मिक संस्थानों में तब तक नहीं भेजें जब तक उन्हें धर्मनिरपेक्ष विषय नहीं पढ़ाए जाते?”
बाल अधिकार संस्था ने कहा कि अगर मदरसा शिक्षा स्कूली शिक्षा का पूरक है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन एनसीपीसीआर के वकील ने कहा कि यह विकल्प नहीं हो सकता। निकाय ने मदरसा प्रणाली की कमियों पर एक रिपोर्ट दाखिल की है और राज्यों को उनका निरीक्षण करने के लिए लिखा है।
पीठ ने पूछा कि क्या एनसीपीसीआर ने अन्य धर्मों के संस्थानों के खिलाफ भी ऐसा ही रुख अपनाया है और क्या उसे पता है कि भारत भर में बच्चों को उनके संबंधित धर्मों के संस्थानों द्वारा धार्मिक शिक्षा दी जाती है।
वकील ने कहा कि एनसीपीसीआर का रुख यह है कि धार्मिक शिक्षा मुख्यधारा की शिक्षा का विकल्प नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने सवाल किया, “हमें बताएं कि क्या एनसीपीसीआर ने सभी समुदायों को निर्देश जारी किया है कि वे अपने बच्चों को किसी भी मठ, पाठशाला आदि में न भेजें।”
उच्चतम न्यायालय ने एनसीपीसीआर से यह भी पूछा कि क्या उसने यह निर्देश जारी किया है कि जब बच्चों को इन संस्थानों में भेजा जाए तो उन्हें विज्ञान और गणित अवश्य पढ़ाया जाना चाहिए।
पीठ ने पूछा, “आप केवल मदरसों को लेकर ही चिंतित क्यों हैं? हम जानना चाहते हैं कि क्या आपने अन्य संस्थानों के साथ भी ऐसा किया है। क्या एनसीपीसीआर ने सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार किया है?”
भाषा नोमान