समितियां मराठा आरक्षण के लिए सगे सोयरे अधिसूचना पर काम कर रही हैं: शिंदे
यासिर नरेश
- 17 Sep 2024, 04:40 PM
- Updated: 04:40 PM
छत्रपति संभाजीनगर, 17 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को कहा कि मराठा समुदाय को आरक्षण के लिए सगे सोयरे अधिसूचना पर समितियां काम कर रही हैं और राज्य सरकार किसी भी समुदाय को मूर्ख नहीं बनाएगी।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मराठों को आरक्षण देने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है, जो एक साल से अधिक समय में उनका छठा अनशन है।
जरांगे उस मसौदा अधिसूचना के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं, जो कुनबी समुदाय को मराठा समुदाय के सदस्यों के ‘सगे सोयरे’ (रक्त संबंधी) के रूप में मान्यता देती है तथा उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण प्रदान करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को समुदाय को आरक्षण प्रदान करने के लिए सतारा, बंबई और हैदराबाद के राजपत्रों पर विचार करना चाहिए।
मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस के अवसर पर छत्रपति संभाजीनगर में मौजूद शिंदे ने कहा, ‘‘राज्य द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति शिंदे समिति ने इस मुद्दे पर काम करना शुरू कर दिया है और कुनबी प्रमाण पत्र (मराठों को) दिए जा रहे हैं। यह एक बड़ी सफलता है। हमने अन्य समुदायों के कोटे में कोई बदलाव किए बिना मराठों को 10 प्रतिशत आरक्षण भी दिया है।’’
उन्होंने कहा कि (सेवानिवृत्त) न्यायमूर्ति संदीप शिंदे और सुनील शुक्रे की अध्यक्षता वाली समिति ‘सगे सोयरे' अधिसूचना और राजपत्र मुद्दे पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार किसी को गुमराह नहीं करेगी। हम जो भी देंगे वह कानून के दायरे में होगा।’’
शिंदे ने कहा कि सरकार ने मराठा समुदाय को बहुत कुछ दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सरकार ने इतना सहयोग किया है तो मराठा समुदाय को भी सहयोग करना चाहिए। उन विपक्षी दलों से भी सवाल पूछे जाने चाहिए जो पहले सत्ता में थे। हमारी नीति स्पष्ट है कि मराठा समुदाय को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन किसी अन्य समुदाय के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।’’
आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए महायुति गठबंधन के बीच सीट बंटवारे के बारे में पूछे जाने पर शिंदे ने कहा कि बातचीत चल रही है।
भाषा यासिर