करंट लगने से मौत: न्यायालय ने मृतक पुलिसकर्मी की पत्नी को 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया
सिम्मी पवनेश
- 10 Sep 2024, 08:56 PM
- Updated: 08:56 PM
नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बीएसईएस को 2017 में करंट लगने से मारे गए एक पुलिस अधिकारी की पत्नी को 10 लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि यह साबित करने के लिए इस स्तर पर ‘‘पर्याप्त साक्ष्य नहीं’’ हैं कि बीएसईएस ने प्रत्यक्ष लापहरवाही की या इसके लिए केवल वह जिम्मेदार है, लेकिन पति की मौत का दुख झेल रही याचिकाकर्ता की पीड़ा को ‘‘कम’’ करना उचित लगता है।
याचिकाकर्ता मृतक पुलिसकर्मी की पत्नी है। उसने मुआवजे के रूप में 50 लाख रुपये की मांग की थी।
दिल्ली पुलिस (यातायात) में 1990 से उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत पुलिस अधिकारी की 21 मई, 2017 को ‘न्यू लाजपत राय मार्केट’ में बारिश से खुद को बचाते समय एक दुकान के पास लगे चैनल गेट के संपर्क में आने के कारण करंट लगने से मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने पांच सितंबर को पारित निर्णय में कहा, ‘‘आरोप पत्र में दुकानदार मुख्य आरोपी है तथा बीएसईएस का नाम (आरोप पत्र में) नहीं है। बीएसईएस की ओर से कोई निश्चित चूक दर्शाने वाले किसी भी भौतिक साक्ष्य के अभाव में अदालत निर्णायक रूप से यह नहीं कह सकती कि बीएसईएस ने लापरवाही की है।’’
अदालत ने आदेश दिया, ‘‘अदालत बीएसईएस द्वारा याचिकाकर्ता को 10,00,000 रुपये की एकमुश्त अनुग्रह राशि दिया जाना उचित समझती है। यह भुगतान याचिकाकर्ता को इस फैसले के पारित होने की तारीख से तीन महीने के भीतर किया जाना चाहिए।’’
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को दीवानी अदालत में जाने की स्वतंत्रता है। उसने कहा, ‘‘सक्षम दीवानी अदालत को निर्देश दिया जाता है कि वह ऐसे किसी भी मुकदमे के दाखिल होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर मामले का निपटारा करे।’’
अदालत ने याचिकाकर्ता को अनुग्रह राशि दिए जाने का आदेश सुनाते हुए इस बात पर गौर किया कि मृतक के परिवार को पारिवारिक पेंशन लाभ के रूप में लगभग 28 लाख रुपये दिए गए हैं तथा उन्हें लगभग 17,000 रुपये मासिक पेंशन भी मिल रही है।
अदालत ने कहा कि अनुग्रह राशि का भुगतान करने के निर्देश का पालन नहीं करने पर याचिकाकर्ता को छह प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज के साथ भुगतान किया जाएगा।
भाषा सिम्मी