पायरेसी वेबसाइट से मालवेयर का शिकार होने का जोखिम सबसे अधिकः रिपोर्ट
प्रेम प्रेम अजय
- 19 Mar 2024, 07:27 PM
- Updated: 07:27 PM
मुंबई, 19 मार्च (भाषा) पायरेसी वेबसाइट से जुड़े भारतीय उपभोक्ताओं के लिए मालवेयर हमले का शिकार होने का अधिक खतरा है और यह जोखिम वयस्क साइट और जुए के विज्ञापनों से भी अधिक है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
‘इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस’ (आईएसबी) की तरफ से मंगलवार को जारी इस अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, वयस्क उद्योग (57 प्रतिशत) और जुए के विज्ञापनों (53 प्रतिशत) की तुलना में पायरेसी साइट तक पहुंचने में मालवेयर (59 प्रतिशत) का खतरा अधिक होता है।
यह अध्ययन भारत में 18 वर्ष से अधिक आयु के 1,037 उत्तरदाताओं के बीच 23-29 मई, 2023 के दौरान किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल चोरी विभिन्न मनोरंजन क्षेत्रों में भारत के सांस्कृतिक उत्पादों के लिए बड़ा जोखिम पैदा करती है। इसमें फिल्म, संगीत, टीवी शो, किताबें, सॉफ्टवेयर और रचनात्मक कार्यों के अन्य रूपों सहित कॉपीराइट सामग्री की अनधिकृत प्रतिलिपि, वितरण या साझा करना शामिल है।
असल उत्पादों की डिजिटल नकल यानी पायरेसी भारतीय मनोरंजन उद्योग की विभिन्न राजस्व धाराओं को प्रभावित करती है जिनमें फिल्मकार, निर्माता, कलाकार और अन्य हितधारक भी शामिल हैं। वैश्विक सलाहकार फर्म ईवाई ने वर्ष 2022 में पायरेसी की वजह से 3.08 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया था।
इस अध्ययन से यह तथ्य सामने आया कि भारत में पायरेसी साइट चलाने वालों के लिए उपयोगकर्ता के कंप्यूटर एवं मोबाइल पर हमला करने वाले मालवेयर का वितरण राजस्व का एक अतिरिक्त जरिया बना हुआ है।
खासकर 18-24 वर्ष की आयु के लोगों में पायरेसी वाली वेबसाइटों तक पहुंचने का अधिक रुझान देखा गया है। इसके साथ युवाओं के बीच साइबर जोखिम को लेकर जागरूकता का स्तर भी बहुत कम है।
आईएसबी इंस्टिट्यूट ऑफ डेटा साइंस के कार्यकारी निदेशक और अध्ययन रिपोर्ट के सह-लेखक प्रोफेसर मनीष गंगवार ने कहा, ‘इन वेबसाइट का पता लगाने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करें।’’
अध्ययन में सरकार को डिजिटल कॉपीराइट अपराधों और प्रवर्तन पर उच्च प्राथमिकता देने और सबसे बड़े पायरेसी गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की भी सिफारिश की गई है।
भाषा प्रेम प्रेम