बड़ी कंपनियों के कब्जे में पड़ी अप्रयुक्त भूमि पर जल्द फैसला करेगी झारखंड सरकार : मंत्री
अमित नेत्रपाल
- 02 Aug 2024, 07:04 PM
- Updated: 07:04 PM
रांची, दो अगस्त (भाषा) झारखंड सरकार भूमि के उन अप्रयुक्त बड़े टुकड़ों पर जल्द फैसला करेगी जो बड़ी कंपनियों के कब्जे में हैं। शुक्रवार को विधानसभा को यह जानकारी दी गई।
राज्य के मंत्री दीपक बिरुआ ने विधानसभा में कहा कि सरकार चाहती है कि इन संसाधनों को उनके मूल मालिकों को लौटा दिया जाए। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘बड़ी कंपनियों के पास जमीन के बड़े टुकड़े बेकार पड़े हैं। सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और हम जल्द ही इस संबंध में फैसला लेंगे।’’
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अप्रयुक्त भूमि के मुद्दे के समाधान के लिए एक आयोग गठित करने की पहले ही इच्छा व्यक्त कर चुके हैं।
इससे पहले, कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने सदन में यह मुद्दा उठाया और कहा कि केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 में प्रावधान है कि अगर किसी कंपनी द्वारा अधिगृहीत भूमि का पांच साल तक उपयोग नहीं किया जाता है, तो उसे मूल मालिक को वापस कर दिया जाना चाहिए या भूमि बैंक में डाल दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि यहां मूल मालिकों से अधिगृहीत भूमि का वर्षों तक उपयोग नहीं किया जाता है और इसे वापस नहीं किया जा रहा है।’’
यादव ने यह भी दावा किया कि राज्य में ऐसी भूमि को उनके मूल मालिकों को वापस करने का प्रावधान हटा दिया गया है। उन्होंने जानना चाहा कि क्या सरकार राज्य के नियमों में संशोधन लाएगी।
नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 18 विधायकों की मौजूदगी के बिना महत्वपूर्ण विधेयकों और मुद्दों पर चर्चा पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो के समक्ष आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों ने पहले ऐसे मुद्दों पर बोलने की इच्छा व्यक्त की थी और उन्हें निलंबित करना उचित नहीं है।
इस बीच, भाजपा के निलंबित 18 विधायकों ने अपने निलंबन के विरोध में विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री के कक्ष के सामने धरना दिया।
झारखंड के 18 भाजपा विधायकों को बृहस्पतिवार को विधानसभा से एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया था और बाद में मार्शल द्वारा उन्हें बाहर कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने सदन छोड़ने से इनकार कर दिया था।
बाउरी ने आरोप लगाया था कि झारखंड में “तानाशाही” है और दावा किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ सरकार के इशारे पर भाजपा विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
भाषा अमित