ग्रामीण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सीएसआर के जरिये सरकार का सहयोग करें उद्योग : शिवकुमार
प्रशांत
- 08 Aug 2026, 10:35 AM
- Updated: 10:35 AM
बेंगलुरु, आठ अगस्त (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने उद्योग जगत से कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत सरकार के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया है ताकि राज्य के ग्रामीण इलाकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और उन्हें प्राथमिक स्तर से ही प्रौद्योगिकी से परिचित कराया जा सके।
शिवकुमार ने शुक्रवार को यहां आयोजित 'ग्रेटर बेंगलुरु आईटी कंपनीज एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन विजन 2030-सीएसआर समिट 2026' को संबोधित करते हुए कहा, ''हमें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को याद करना चाहिए जिनके नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल के दौरान सीएसआर कानून में संशोधन किए गए थे। उन्होंने देश को एक नयी दिशा दी। सीएसआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जिएं।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने राज्य के बजट में सीएसआर के सहयोग से 2,000 सरकारी स्कूल विकसित करने की योजना की घोषणा की है।
उन्होंने कहा, ''कर्नाटक में परोपकार की समृद्ध परंपरा रही है। इस धरती की महान हस्तियां सदियों से समाज सेवा करती आई हैं। लोग मुख्य रूप से शिक्षा और रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करते हैं। इस पलायन को रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करानी होगी। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं।''
शिवकुमार ने कहा कि सीएसआर समाज और बच्चों के भविष्य में एक निवेश है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियां सरकारी विद्यालयों को गोद लेकर उन्हें विकसित कर सकती हैं और साथ ही अपनी 'ब्रांड पहचान' भी बनाए रख सकती हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के नाम में संबंधित कंपनी का नाम भी जोड़ा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्फोसिस और विप्रो समेत कई संगठन सीएसआर के तहत सराहनीय काम कर रहे हैं और सरकार के पास उनके कार्यों का विवरण है।
शिवकुमार ने कहा, ''सीएसआर के जरिये योगदान देना केवल सरकार की मदद करना नहीं है। यह समाज और हमारे बच्चों के भविष्य में निवेश है। संस्थानों को ग्रामीण विद्यालयों के विकास में अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करना चाहिए।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में रहने वाले बच्चों को ग्रामीण जीवन, कृषि और किसानों की कठिनाइयों को नजदीक से जानने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''मैंने बेंगलुरु के कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय से ऐसा पाठ्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया है, जिसके तहत छात्रों के लिए किसी गांव में तीन दिन बिताना अनिवार्य हो।''
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक बड़े निजी स्कूल का प्रबंधन कम से कम एक सरकारी स्कूल को गोद लेकर उसके विकास में मदद करे।
भाषा सिम्मी प्रशांत
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