उच्च न्यायालय ने सीजीपीएससी घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी को जमानत देने से इनकार किया
शफीक
- 07 Aug 2026, 12:33 AM
- Updated: 12:33 AM
रायपुर/बिलासपुर, छह अगस्त (भाषा) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 'छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग' (सीजीपीएससी) परीक्षा गड़बड़ी मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी की जमानत अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक करवाना ''हत्या के अपराध से भी अधिक जघन्य'' है क्योंकि यह लाखों उम्मीदवारों के करियर को बर्बाद कर देता है और समाज पर बुरा असर डालता है।
आरोपी जीवन किशोर ध्रुव (62) को सीबीआई ने सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया था, जो 2020-2022 भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के समय सीजीपीएससी के सचिव के तौर पर काम कर रहे थे। जीवन किशोर के बेटे सुमित ध्रुव भी इस मामले में आरोपी हैं, जो भर्ती परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के तौर पर चुने गए थे।
न्यायाधीश बिभू दत्ता गुरु ने 31 जुलाई को जीवन किशोर ध्रुव की जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित रख लिया था जिसे बुधवार को सुनाया गया।
अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए, मामले में दूसरे आरोपियों की जमानत अर्जी पर फैसला सुनाते समय की गई अपनी पिछली बातों को दोहराया।
उच्च न्यायालय ने कहा, ''इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की जमानत अर्ज़ियों पर विचार करते समय जो बात कही गई थी, उसे फिर से दोहराया जा रहा है: जो व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक करवाने में मदद करता है, वह लाखों युवा उम्मीदवारों के करियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है। ये उम्मीदवार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। ऐसा काम हत्या के अपराध से भी अधिक जघन्य है, क्योंकि किसी व्यक्ति की हत्या से सिर्फ एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन लाखों उम्मीदवारों का करियर बर्बाद होने से पूरे समाज पर बुरा असर पड़ता है।''
न्यायालय ने कहा, ''मामले की पूरी स्थिति पर विचार करने के बाद; खासकर आवेदक की भूमिका को देखते हुए, जिसने सीजीपीएससी के सचिव के तौर पर काम करते हुए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। उसने सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा, 2021 के गोपनीय प्रश्न-पत्र अपने पास रखे और उन्हें अपने बेटे को दे दिए, जो उस परीक्षा में उम्मीदवार था। इसके बाद उसने डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हासिल किया।''
आदेश में कहा गया कि आवेदक के घर से बरामदगी, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी सबूत प्रथम दृष्टया कथित साज़िश में उसकी संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।
सुनवाई के दौरान, ध्रुव के अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने दलील दी कि आवेदक को इस मामले में सिर्फ इसलिए गलत तरीके से फंसाया गया है क्योंकि वे सीजीपीएससी में सचिव के पद पर थे। मूल प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था और उन्हें जांच के दौरान बाद में फंसाया गया।
अधिवक्ता ने कहा कि एक मोबाइल फोन जब्त होने के अलावा, आवेदक के पास से कोई भी आपत्तिजनक वस्तु, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या अन्य सामग्री बरामद या जब्त नहीं की गई है। ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि आवेदक ने कोई गोपनीय प्रश्न पत्र लीक किया हो या अपने बच्चों को कोई गोपनीय जानकारी दी हो।
जमानत अर्जी का विरोध करते हुए, सीबीआई के अधिवक्ता वैभव गोवर्धन ने कहा कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता, जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों और आपराधिक साजिश में उनकी अहम भूमिका को देखते हुए आवेदक जमानत पाने का हकदार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह मामला सीजीपीएससी की राज्य सिविल सेवा परीक्षा, 2021 के आयोजन में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं से जुड़ा है, जो सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की ईमानदारी और निष्पक्षता पर चोट करता है और हजारों उम्मीदवारों के भरोसे को प्रभावित करता है।
छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी 2020-2022 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर दो मामले दर्ज किए गए थे। बाद में सीबीआई ने जुलाई 2024 में सीजीपीएसी भर्ती घोटाले की जांच अपने हाथ में ले ली।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उनके भतीजे नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी, परीक्षाओं के पूर्व उप नियंत्रक ललित गनवीर, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार शामिल हैं।
भाषा संजीव शफीक
शफीक
0708 0033 रायपुर