शिवसागर और चराइदेव में बाढ़ प्रभावित लोग नगालैंड में खनन पर निर्भर हैं: असम के मुख्यमंत्री
सुरेश
- 04 Aug 2026, 09:38 PM
- Updated: 09:38 PM
गुवाहाटी, चार अगस्त (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को दावा किया कि असम के ऊपरी हिस्सों में बाढ़ से प्रभावित ज्यादातर लोगों की आजीविका पड़ोसी राज्य नगालैंड में कोयला और रेत खनन गतिविधियों पर निर्भर है।
शर्मा का यह बयान विपक्ष की उस मांग के बाद आया है, जिसमें असम के ऊपरी हिस्सों में बार-बार आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए सभी कथित अवैध कोयला और रेत खदानों को बंद करने की मांग की गई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि असम सरकार नगालैंड में हो रहे खनन को नहीं रोक सकती और इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार को शामिल करना पड़ेगा।
बाढ़ से शिवसागर और चराइदेव जिलों, विशेष रूप से असम-नगालैंड सीमा से लगे क्षेत्रों में व्यापक तबाही हुई। इस दौरान कम से कम 87 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 1.3 लाख लोग प्रभावित हुए।
कांग्रेस, रायजोर दल और असम जातीय परिषद जैसे विपक्षी दलों के साथ-साथ किसान संगठन कृषक मुक्ति संग्राम समिति ने आरोप लगाया है कि असम के ऊपरी जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ ''मानव निर्मित'' है, क्योंकि यह असम और नगालैंड के प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं तथा कोयला-पत्थर माफिया के बीच गठजोड़ का परिणाम है।
शर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''इन प्रभावित इलाकों के सभी लोग खनन पर निर्भर हैं। इसलिए मैंने जनता से इस बारे में फैसला लेने का आग्रह किया है।''
उन्होंने कहा कि पत्थर नगालैंड से आते हैं, क्योंकि वहां खनन होता है और असम पड़ोसी राज्य में जाकर खनन रोक नहीं सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''हम असम के बिहुबोर में स्टोन क्रशर बंद कर सकते हैं। कोयला खनन भी असम में नहीं होता है, यह नगालैंड में होता है। हम यह तय नहीं कर सकते कि नगालैंड सरकार कौन-सी नीति अपनाएगी।''
उन्होंने कहा कि असम सरकार केंद्र सरकार के माध्यम से नगालैंड से बातचीत करने की कोशिश करेगी।
शर्मा ने कहा, ''असम के भीतर कोई अवैध खनन नहीं होता। बाढ़ की स्थिति सुधरने के बाद मैं खुद बातचीत करने की कोशिश करूंगा।''
जब उनसे पूछा गया कि क्या इतनी बड़ी तबाही के लिए अवैध खनन जिम्मेदार है, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि सही कारण जानने के लिए सरकार को विशेषज्ञों की राय लेनी होगी।
उन्होंने कहा, ''हर साल बारिश होती है, लेकिन इस तरह की बाढ़ पहले कभी नहीं आई। उपग्रह आंकड़ों का अध्ययन करना होगा और आईआईटी जैसे संस्थानों को इसमें शामिल करना होगा। हम राजनेता इतनी आसानी से टिप्पणी नहीं कर सकते।''
विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने दावा किया है कि नगालैंड के सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों में अवैध खुले खनन के कारण बड़े-बड़े गड्ढे और कृत्रिम जलाशय बन गए हैं।
उनके अनुसार, भारी बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी जमा हो जाता है और बाद में यह नीचे की ओर बहकर टूट जाता है, जिससे असम में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा होती है।
इस बीच, असम में मंगलवार को बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही। हालांकि राज्य के ज्यादातर हिस्सों में पानी घट रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में मृतकों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है और करीब 1.3 लाख लोग अब भी प्रभावित हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने शिवसागर में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी (आरजीआईपीटी) परिसर में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर का दौरा किया और वहां रह रहे बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।
उन्होंने कहा, ''लोगों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने और पुनर्वास के लिए उनकी सहायता हेतु असम हर चुनौती का सामना करेगा। हम हर प्रभावित परिवार से प्रतिक्रिया ले रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें राहत और सहायता मिली है या नहीं।''
शर्मा ने कहा कि नौ अगस्त से सरकारी टीमें प्रभावित परिवारों के नुकसान का जमीनी आकलन करने के लिए हर घर तक पहुंचेंगी।
उन्होंने कहा, ''मैं असम के हर बाढ़ प्रभावित परिवार को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस कठिन समय में सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। पुनर्वास से लेकर जीवन को सामान्य स्थिति में लाने तक हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। आज शिवसागर के एक राहत शिविर में मैंने इसी संकल्प को दोहराया है।''
भाषा राखी सुरेश
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