जंतर-मंतर पर मुझे, मेरी स्वर्गीय मां को गालियां दी गईं, पर मैं बच्चों को माफ करना चाहता हूं: मोदी
पारुल
- 01 Aug 2026, 01:12 AM
- Updated: 01:12 AM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान न सिर्फ उनके, बल्कि उनकी स्वर्गीय मां के लिए भी भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया गया।
मोदी ने कहा कि ''हमारी बेटियों'' द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन ''गुमराह बच्चों'' को माफ किए जाने की जरूरत है।
'इंस्टाग्राम' पर देर रात जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह समाज में व्याप्त आक्रोश को समझते हैं, लेकिन यह "गुमराह बच्चों" को अपनाने और उन्हें सही राह दिखाने का समय है।
मोदी ने कहा कि उनका मन यह कह रहा था कि नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान जो कुछ भी हुआ, उसे लेकर उन्हें बच्चों से बात करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "कुछ 'शरारती बच्चों' ने मेरे और मेरी स्वर्गीय माता के खिलाफ गंदी गालियों का इस्तेमाल किया। सभ्य समाज में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल ठीक नहीं है।"
मोदी ने कहा, ''केवल मुझे ही नहीं, मेरी स्वर्गीय माता को भी गालियां दी गईं। लेकिन गालियां कभी किसी समस्या का समाधान नहीं होतीं। आइए, इन गुमराह बच्चों को सही राह दिखाएं।''
उन्होंने कहा, ''मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। लोगों से गलतियां हो जाती हैं, लेकिन यह 'कल्चर शॉक' है, सांस्कृतिक दृष्टि से हमारे लिए चिंता का विषय है कि हमारी बेटियां इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं। हमें इन गुमराह बच्चों को माफ करना चाहिए, आखिर वे हमारे ही बच्चे हैं। उन्हें सही राह दिखाना हमारा काम है।''
प्रधानमंत्री ने एक उदाहरण देते हुए कहा, ''अगर दांत गलती से जीभ को काट ले, तो हम दांत को तोड़ते नहीं हैं, क्योंकि दोनों हमारे ही हैं। उसी तरह हमारे बच्चे भी हमारे अपने हैं।''
मोदी ने कहा कि बचपन में सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है।
उन्होंने कहा, ''इसीलिए मैं समाज में व्याप्त आक्रोश को पूरी तरह समझता हूं... लेकिन यह समय इन बच्चों को गले लगाकर उन्हें सही राह दिखाने का है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन बच्चों को सजा देने या उन्हें अदालतों के चक्कर कटवाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ''समाज को भी मेरी बात स्वीकार करनी चाहिए, क्योंकि कई बार लोग भटक जाते हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि उन्हें दंडित किया जाए। ये बच्चे हमारे अपने हैं। उन्हें सही राह दिखाना हमारा काम है। यह कठिन काम है, लेकिन इसे करना ही होगा।''
युवा प्रदर्शनकारियों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि वह ''इन साथियों'' से कहना चाहते हैं कि वे देश के लिए आगे आएं, नयी बातें सीखें और अपनी गलतियों से सबक लें।
उन्होंने कहा, ''देश आगे बढ़ रहा है। आप भी आगे बढ़ें, आप भी उन्नति करें। यही मेरा सपना है। मैं आपके लिए जीता हूं और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करता हूं। आइए, हम सब मिलकर देश को आगे बढ़ाएं। अपनी गलतियों से सीखें और आगे बढ़ें।''
जंतर-मंतर पर छात्रों का यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुआ था। प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ और 36 दिन बाद 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों की मांगें स्वीकार किए जाने के बाद समाप्त हुआ।
इस आंदोलन ने देशभर में हजारों छात्रों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया और इसे प्रमुख विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला।
भाषा सुरभि पारुल
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