अगर पति व्यभिचार का आरोप लगाता है, तो अदालत को पहले इस मुद्दे पर फैसला करना होगा: न्यायालय
पारुल
- 31 Jul 2026, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि अगर पति व्यभिचार का आरोप लगाता है, तो अदालत को पत्नी को अंतरिम गुजरा भत्ता देने का फैसला सुनाने से पहले पहले उस आरोप पर निर्णय लेना होगा।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि अदालतों का यह मानना त्रुटिपूर्ण होगा कि ऐसे आरोप पर निर्णय केवल सुनवाई के अंतिम चरण में ही किया जा सकता है।
पीठ ने कहा, ''चूंकि, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125(4) में यह प्रावधान है कि अगर व्यभिचार का आरोप साबित हो जाता है, तो पत्नी न तो अंतरिम और न ही अंतिम गुजारा-भत्ता की हकदार होगी। इसलिए हमारा मत है कि अगर पति धारा 125(4) के तहत आवेदन करता है और शुरू में ही सबूतों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोप साबित कर देता है, तो अंतरिम गुजारा-भत्ता पर रोक लगाई जा सकती है।''
शीर्ष अदालत का यह फैसला एक व्यक्ति की अपील पर आया है। व्याभिचार के आधार पर गुजारा भत्ता का विरोध करने वाली व्यक्ति की याचिका को राजस्थान उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिसे चुनौती देते हुए उसने शीर्ष अदालत का रुख किया था।
याचिकाकर्ता व्यक्ति और महिला का विवाह सात जुलाई 2014 को हुआ था।
शादी के कुछ साल बाद ही उनके बीच परेशानियां शुरू हो गईं, जिसके कारण महिला ने कथित तौर पर पुरुष पर कई आरोप लगाए और पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराईं।
आखिरकार, 13 मई 2020 को उसने अपने बच्चे और कीमती सामान के साथ ससुराल छोड़ दी।
बाद में महिला ने उदयपुर के विशेष अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अंतरिम गुजारा-भत्ता के लिए अर्जी दी। इसके बाद व्यक्ति ने भी सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत अर्जी दाखिल की और दलील दी कि पत्नी के व्यभिचारपूर्ण आचरण के कारण वह किसी भी तरह के अंतरिम गुजारा-भत्ता की हकदार नहीं है। हालांकि, अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी।
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह साबित करने के लिए कि पत्नी विवाहेतर संबंध में रह रही थी, पति ने कई तस्वीरें और अन्य सबूत पेश किए हैं।
सीआरपीसी की धारा 125(4) के अनुसार, अगर कोई पत्नी व्यभिचार में शामिल है, तो वह धारा 125 के तहत अपने पति से गुजारा-भत्ता, अंतरिम गुजारा-भत्ता या कानूनी खर्च का दावा नहीं कर सकती।
शीर्ष अदालत ने पत्नी की तस्वीरें और वीडियो हासिल करने के लिए पति द्वारा निजी जासूस का इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए।
पीठ ने कहा कि सबूत इकट्ठा करने के बदलते तरीकों से निपटने के लिए एक व्यवस्था होनी चाहिए।
भाषा सुरभि पारुल
पारुल
3107 2004 दिल्ली