कर्नाटक: कावेरी नदी से जुड़े आदेश के विरोध में भाजपा का प्रदर्शन, केआरएस बांध के पास कई नेता गिरफ्तार
रंजन
- 31 Jul 2026, 03:53 PM
- Updated: 03:53 PM
मांड्या, 31 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र समेत कई नेताओं को शुक्रवार को कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु की ओर छोड़े जाने के विरोध में यहां कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध का घेराव करने के लिए मार्च निकालने के बाद एहतियातन हिरासत में ले लिया गया। भाजपा ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार यह भरोसा नहीं दिलाती कि कावेरी का पानी तमिलनाडु की ओर नहीं छोड़ा जाएगा, तो पार्टी दो अगस्त को मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार करेगी। कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार किसान विरोधी है और कर्नाटक के हितों की रक्षा करने में नाकाम रही है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने राज्य की दो महत्वपूर्ण दलीलों के बावजूद तमिलनाडु को 15 दिनों तक हर दिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के कावेरी जल विनियमन समिति के आदेश को बरकरार रखा।
कर्नाटक की ओर से दी गयी दलीलों में इस बार मानसून की बारिश बहुत कम होने और भीषण सूखे जैसी स्थिति के बारे में अवगत कराया गया था।
प्रदर्शन में भाजपा के बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था।
विजयेंद्र के अलावा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलावादी नारायणस्वामी और विधान परिषद के सदस्य सी. सी. टी. रवि को भी हिरासत में लिया गया।
मार्च निकालने से पहले पार्टी नेताओं ने केआरएस बांध के पास धरना दिया।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा और पूर्व सांसद सुमलता अंबरीश भी मौजूद रहीं।
विजयेंद्र ने मार्च शुरू होने से पहले सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया, "शिवकुमार के कुर्सी संभालने और जब से वह मुख्यमंत्री बने हैं, तब से लगता है कि वह किसानों को भूल गए हैं।"
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने किसानों के हितों से ज्यादा राजनीति को महत्व दिया।
उन्होंने कहा कि कावेरी विवाद में कर्नाटक के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय सरकार मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई में ही उलझी रही।
विजयेंद्र ने तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़े जाने के फैसले पर मुख्यमंत्री शिवकुमार से सवाल पूछा और दावा किया कि कोई भी फैसला लेने से पहले न तो कानूनी विशेषज्ञों से गंभीर चर्चा की गई और न ही अन्य संबंधित पक्षों से सलाह ली गई।
विजयेंद्र ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के आदेश के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने के सरकार के फैसले की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा, "जब नुकसान हो ही चुका है, तब गुस्सा जताने का क्या फायदा?"
भाषा जितेंद्र रंजन
रंजन
3107 1553 मांड्या