भाजपा में शामिल होने वाले गोवा के विधायकों के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा न्यायालय
पवनेश
- 23 Jul 2026, 06:08 PM
- Updated: 06:08 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को गोवा विधानसभा अध्यक्ष के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। विधानसभा अध्यक्ष ने 2022 में सत्ताधारी भाजपा में शामिल होने वाले पार्टी के आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने के कांग्रेस के अनुरोध को ठुकरा दिया था।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आठ विधायकों के दल-बदल को लेकर कांग्रेस नेता गिरीश चोडणकर की अपील को स्वीकार कर लिया।
प्रधान न्यायाधीश ने अंतिम सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार करते हुए पूछा, "क्या उच्च न्यायालयों के बीच कोई मतभेद है?"
उन्होंने कहा, "अंतिम सुनवाई के लिए याचिका को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष प्रस्तुत करें।"
शुरुआत में, कांग्रेस नेता के वकील ने कहा कि पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुने गए 11 विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, अगर किसी विधायक दल के दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो इसे राजनीतिक दलों का विलय ही माना जाएगा।
रोहतगी ने कहा कि इस मामले पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है क्योंकि इस विधानसभा का कार्यकाल भी खत्म हो जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से पेश हुए।
पार्टी बदलने की इन घटनाओं के बाद गोवा विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का बहुमत 25 (20 भाजपा विधायक, 2 एमजीपी, 3 निर्दलीय) से बढ़कर 33 हो गया। कांग्रेस के पास तीन विधायक बचे हैं और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के पास एक विधायक है। विधानसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के दो और रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी का एक विधायक है।
कांग्रेस विधायकों ने भाजपा में शामिल होने का कदम ऐसे समय उठाया था जब राहुल गांधी 'भारत जोड़ो यात्रा' का नेतृत्व कर रहे थे।
इससे पहले दिसंबर 2024 में, उच्चतम न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था, जिसमें कांग्रेस की ओर से दल-बदल के आधार पर अयोग्यता की याचिका को खारिज कर दिया गया था।
पीठ ने कहा कि वह "प्रथम अपील अदालत" नहीं बनेगी और चोडणकर से कहा कि वे बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ में जाएं तथा विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दें।
भाषा प्रशांत पवनेश
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