नड्डा का बयान सत्ता पक्ष में बढ़ते हाताशा का स्पष्ट संकेत : कांग्रेस
रंजन
- 23 Jul 2026, 12:49 AM
- Updated: 12:49 AM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने पार्टी नेता राहुल गांधी पर बुधवार को केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा निशाना साधे जाने पर पलटवार करते हुए कहा कि पूर्व भाजपा अध्यक्ष का संवाददाता सम्मेलन दूसरों पर केवल सवाल उठाने की एक और कड़ी थी और सत्ता पक्ष में बढ़ती हताशा का स्पष्ट संकेत है।
कांग्रेस के संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि नड्डा को संवाददाता सम्मेलन में 'बचकाना आरोप-प्रत्यारोप' से आगे बढ़कर सबसे पहले 'प्रधानमंत्री और मंत्री प्रधान' की 'नाकामियों' को स्वीकार करना चाहिए था।
रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''राहुल गांधी द्वारा मोदी सरकार की तीखी और सटीक आलोचना का जवाब देने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष जे.पी. नड्डा द्वारा देर शाम संबोधित किया गया संवाददाता सम्मेलन सरकार की बढ़ती हताशा का पुख्ता संकेत है।''
उन्होंने कहा, '' पूरा संवाददाता सम्मेलन सवालों का जवाब देने के बजाय दूसरों पर सवाल उठाने की एक कभी न खत्म होने वाला श्रृंखला था। नड्डा को इस तरह की बचकानी उंगली उठाने वाली राजनीति से ऊपर उठकर, सबसे पहले 'मंत्री प्रधान' और 'प्रधान मंत्री' की नाकामियों के अनोखे और ज़बरदस्त स्वरूप को स्वीकार करना चाहिए। आप क्रोनोलॉजी समझिए...।'' उन्होंने आगे कहा।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि जब छात्र कथित प्रश्नपत्र लीक और भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरे, तो ''प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर अभूतपूर्व बर्बरता की - लाठीचार्ज, पानी की बौछारें , आंसू गैस के गोले और खबरों के मुताबिक पैलेट गन और शॉक बैटन का भी इस्तेमाल किया''।
उन्होंने कहा, '' नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र लीक होना तो महज एक लक्षण है। असल समस्या कहीं ज़्यादा गहरी है। हमारे छात्रों का गुस्सा मंत्री प्रधान की आम अक्षमता, मोदी सरकार की बेहद खराब शिक्षा नीतियों और प्रधानमंत्री के अहंकार के प्रति है।''
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि एक अजीब बात देखने को मिली - स्वास्थ्य मंत्री ने शिक्षा मंत्री से जुड़े मुद्दों पर बात की और प्रधानमंत्री ने किसी भी चीज पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि यह इस सरकार की खासियत रही है।
उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री, उनकी चुप्पी और एक भ्रष्ट मंत्री को उनका समर्थन भी हैरान करने वाला है।''
खेड़ा ने 'पीटीआई-वीडियो' से बातचीत में कहा, ''हमें लगा था कि नड्डा जी आएंगे और (शिक्षा मंत्री) धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय, नड्डा जी विपक्ष और राहुल गांधी पर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि छात्रों पर आंसू गैस, लाठी और पैलेट का इस्तेमाल करने के बाद केंद्र सरकार उनसे चुप रहने की उम्मीद नहीं कर सकती।
खेड़ा ने कहा, ''हम आपकी पसंद के 'पालतू' या 'आज्ञाकारी' विपक्ष नहीं हैं। आप वैसा विपक्ष कहीं और जाकर ढूंढ सकते हैं। आप जानते हैं कि मैं किन पार्टियों की बात कर रहा हूं। उनसे कहिए कि वे उन राजनीतिक पार्टियों के साथ जुगलबंदी करें, न कि कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी के साथ।'' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रश्नपत्र लीक के असली मुद्दे पर बात नहीं कर रही है।
इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष से अपील की कि वह आरोप-प्रत्यारोप में पड़ने के बजाय संसद में इस मुद्दे पर 'विस्तृत' चर्चा होने दें ताकि समस्या का 'स्थायी समाधान' निकाला जा सके।
नड्डा ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार एक ''जिम्मेदार और संवेदनशील सरकार'' है और वह इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर है।
रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में घटनाओं का क्रम बताते हुए कहा कि मोदी सरकार ने खास तौर पर परीक्षाएं आयोजित करने के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए)बनाई थी।
उन्होंने कहा, '' मोदी सरकार ने जान-बूझकर एनटीए द्वारा संचालित परीक्षाओं की एक केंद्रीयकृत व्यवस्था बनाई और विश्वविद्यालयों तथा राज्यों को इसे अपनाने के लिए मजबूर किया। एनटीए को अस्तित्व में लाने के लिए पहले से मौजूद व्यवस्था को खत्म कर दिया गया।''
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दावा किया, '' एनटीए ने बार-बार यह साबित किया है कि वह पूरी तरह से दबाव में है और इस काम के लिए बिल्कुल भी सक्षम नहीं है। अपनी शुरुआत से लेकर अब तक, इसकी देखरेख में प्रश्नपत्र लीक होने की कम से कम नौ घटनाएं हुई हैं - जिनमें 2024 की घटना भी शामिल है, जब गड़बड़ियों के कारण एनटीए को कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं।''
उन्होंने कहा, ''वर्ष 2024 की जबरदस्त नाकामी के बाद, प्रधानमंत्री ने वादा किया कि एनटीए में सुधार किए जाएंगे। एनटीए में सुधार के सुझाव देने के लिए के राधाकृष्णन समिति बनाई गई थी और उसने 101 सिफारिशें कीं। सुधारों को गंभीरता से लागू करने के बजाय, प्रधानमंत्री टालमटोल करते रहे और उन्होंने बहुत ज़्यादा लापरवाही दिखाई।''
रमेश ने दावा किया, ''एनटीए में सबसे अहम कार्यकारी पद, यानी महानिदेशक का पद 2024 में प्रश्नपत्र लीक होने और 2026 में प्रश्नपत्र लीक होने के बीच के पूरे समय के दौरान अधिकारियों के पास अतिरिक्त प्रभार के तौर पर रहा।''
उन्होंने कहा कि जैसा कि उम्मीद थी एनटीए की देखरेख में नीट-यूजी2026 का प्रश्नपत्र एक बार फिर 'लीक' हो गया और उन्हें चिकित्सा प्रवेश परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ''इस स्थिति में भी,एनटीए और उच्च शिक्षा विभाग ने शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति के सामने बेशर्मी से दावा किया कि कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था। मंत्री प्रधान (शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान) के लिए सच्चाई से ज्यादा ज़रूरी दिखावा था।''
उन्होंने कहा, ''इस बीच, हमेशा अहंकार में रहने वाले प्रधानमंत्री ने संसद और समझदारी भरी सलाह के प्रति पूरी तरह अनादर दिखाया। उन्होंने एनटीए को मजबूत करने के लिए शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को सिर्फ इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि समिति में विपक्ष के सदस्य शामिल थे।'
रमेश ने कहा कि देश भर में हुए विरोध के बावजूद, एनटीए ने यूजीसी-नेट समाजशास्त्र 2026 परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक की खबरों और यूजीजी-नेट अंग्रेजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बावजूद उनपर कोई कार्रवाई नहीं की।
भाषा धीरज रंजन
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