दुग्ध संघ को फल-सब्जी और खाद्य तेल के कारोबार में भी उतरना चाहिए:एनडीडीबी अध्यक्ष
संतोष
- 04 Sep 2026, 08:01 PM
- Updated: 08:01 PM
पटना, चार सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बिहार के दुग्ध संघों को पारंपरिक दूध कारोबार से आगे बढ़कर फल, सब्जी और खाद्य तेल जैसे क्षेत्रों में भी व्यवसाय का विस्तार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का भविष्य मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों में है और संघों को आधुनिक प्रसंस्करण क्षमता विकसित करनी चाहिए।
डॉ. शाह ने शुक्रवार को पटना स्थित 'बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड' (कॉम्फेड) के मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि दुग्ध संघों को आइसक्रीम, योगर्ट, पनीर तथा किण्वित दुग्ध उत्पादों के आधुनिक संयंत्र स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए। बैठक की अध्यक्षता कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक सह अध्यक्ष शीर्षत कपिल अशोक ने की।
'कॉम्फेड' की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, बाजार के बदलते रुझानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में दूध और दुग्ध उत्पादों का कारोबार लगभग 70:30 के अनुपात में है जिसे 60:40 अथवा 50:50 के स्तर तक लाने की आवश्यकता है, ताकि मूल्य संवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके।
एनडीडीबी अध्यक्ष ने सरसों तेल क्षेत्र में बोर्ड की पहल का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रूड ऑयल और नमी के प्रतिशत के आधार पर मूल्य निर्धारण की व्यवस्था से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी अधिक कीमत मिली है।
उन्होंने सहकारी क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर बल देते हुए कहा कि नई बहु-राज्य सहकारी समितियों के माध्यम से उभर रहे अवसरों का लाभ उठाया जाना चाहिए।
डॉ. शाह ने कहा कि डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा और चारा बीज का उत्पादन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने चारा विकास कार्यक्रम को मजबूत करने तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी), राष्ट्रीय गोकुल मिशन और श्वेत क्रांति 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
बैठक में राज्य में दुग्ध संग्रह में आई तेजी की सराहना की गई तथा नई दुग्ध सहकारी समितियों के गठन पर विशेष बल दिया गया।
डॉ. शाह ने मिथिला हस्तकला को बढ़ावा देने की कॉम्फेड की पहल की भी सराहना की।
भाषा कैलाश
संतोष
संतोष
0409 2001 पटना