छात्र आतंकवादी नहीं; उनके और सांसदों के खिलाफ कार्रवाई सरकार की 'बौखलाहट भरी प्रतिक्रिया': राहुल
रंजन
- 22 Jul 2026, 09:49 PM
- Updated: 09:49 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपना पूरा समर्थन देते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत उनकी सभी मांगें पूरी तरह जायज हैं और उन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार और उसका नेतृत्व बौखलाहट की स्थिति में है और इसी कारण वह छात्रों तथा विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन स्थल से उन्हें "घसीटकर और घूसा मारकर हटाया गया।"
उन्होंने कहा कि उनका "काम भारत की जनता की इच्छा को अभिव्यक्त करना है" और "इसके लिए ऐसी छोटी-मोटी कीमत चुकानी पड़ती है।"
राहुल गांधी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र आतंकवादी नहीं हैं और वे केवल ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जो निष्पक्ष, विश्वसनीय और प्रभावी हो।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने तथा छात्रों पर हुए कथित हमले के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग का भी समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि "संवेदनशील" पुलिसकर्मी भी मानते हैं कि छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई देश के भविष्य के खिलाफ अपराध है।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था न केवल धांधली से भरी है, बल्कि यह आम लोगों की पहुंच से बाहर भी है।
उन्होंने कहा कि गरीब छात्र इसका खामियाजा भुगतते हैं, जबकि पैसे वाले लोग प्रश्नपत्र लीक जैसी गड़बड़ियों के जरिए परीक्षा प्रणाली में आगे निकल जाते हैं और इस व्यवस्था को बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि छात्रों की तीनों मांगें— शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों पर कथित हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करके उनकी जवाबदेही तय करना और प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों से माफी मांगना— किसी भी स्थिति में समझौते योग्य नहीं हैं।
गांधी ने कहा कि किसी को भी छात्रों से जुड़े मूल मुद्दों और उनके साथ हुए अत्याचारों से ध्यान भटकाने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "हर सरकार के कार्यकाल में एक समय ऐसा आता है, जब वह मनोवैज्ञानिक रूप से बिखरने लगती है, उसका नेतृत्व कमजोर पड़ जाता है और अब वही स्थिति आ गई है।"
उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार वास्तव में बौखलायी हुई है। छात्रों के साथ जो किया गया, वह बौखलाहट में की गई कार्रवाई थी। कल हमारे साथ जो हुआ, वह भी बौखलाहट भरी प्रतिक्रिया थी।"
गांधी ने कहा, "मेरे साथ कैसा व्यवहार किया गया, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे इसकी परवाह नहीं है। मेरे साथ पांच गुना ज्यादा बुरा व्यवहार कीजिए, तब भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि छात्रों के साथ क्या हुआ, शिक्षा व्यवस्था की स्थिति क्या है, प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं क्यों हो रही हैं और इन बच्चों को इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। मेरे साथ आप जो चाहें करें, पांच गुना या दस गुना ज्यादा भी करें, मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है।"
गांधी ने उनके साथ पुलिस द्वारा किये गए व्यवहार का उल्लेख करते हुए कहा, "वास्तव में, मुझे इससे कोई शिकायत नहीं है। बल्कि मुझे यह अच्छा लगता है, क्योंकि इससे मुझे सीखने को मिलता है।"
उन्होंने कहा, "मुझे घूसों की आदत है, इसमें कोई दिक्कत नहीं।" उन्होंने दावा किया कि उनका काम भारत की जनता की आवाज उठाना और उन मुद्दों को सामने लाना है, जिनसे लोगों को पीड़ा हो रही है। उन्होंने कहा, "एक-दो घूसों से कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं ऐसे कई और घूसे झेलने को तैयार हूं।"
गांधी ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें घसीटकर वहां से हटाया, लेकिन उनमें से कुछ ने उनके कान में कहा कि "इस सरकार को हटाइए। यह भावना है।"
उन्होंने कहा, "पुलिस भी जो कुछ हुआ उससे खुश नहीं है। संवेदनशील पुलिसकर्मी मानते हैं कि छात्रों के साथ जो किया जा रहा है, वह देश के भविष्य के खिलाफ अपराध है। वे इन छात्रों में अपने बच्चों की छवि देखते हैं।"
संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत सोमवार के 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता का वीडियो दिखाकर की गई।
पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा, "सवाल यह है कि हमारे छात्रों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है। उन्होंने ऐसा क्या किया कि उन पर सुरक्षा बलों ने हथियार तान दिए, उन्हें पीटा गया और लाठियों से मारा गया?"
उन्होंने कहा, "वे शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं और केवल वही मांग रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं। वे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि 'हमें निष्पक्ष शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए।"
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने कहा, "बच्चों ने आत्महत्या की है, वे असीमित तनाव से गुजर रहे हैं और यह देश के सामने एक वास्तविक तथा बेहद गंभीर समस्या है।"
उन्होंने कहा, "यह बात अब सभी के लिए स्पष्ट है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, जिसे कभी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता था, अब धांधली से ग्रस्त हो गई है।"
उन्होंने कहा, "बच्चों ने आत्महत्या की है, वे असीमित तनाव से गुजर रहे हैं और यह देश के सामने एक वास्तविक तथा बेहद गंभीर समस्या है।"
गांधी ने दावा किया कि पिछले एक दशक में 152 प्रश्नपत्र लीक हुए, लेकिन किसी भी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में आई इस गिरावट से 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, "152 प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं के बावजूद एक भी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई है।"
उन्होंने कहा, "हर महीने लाखों छात्रों से कहा जाता है कि जिस तनाव से वे गुजरे हैं, उसे फिर से झेलना होगा और किसी को इसकी परवाह नहीं है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं।
गांधी ने दावा किया कि परिवार हर साल परीक्षाओं पर 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये के शिक्षा बजट के बराबर है।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "यह इन परिवारों के साथ खुली लूट है और उनसे पैसा लेने के बाद कहा जाता है कि प्रश्नपत्र लीक हो गया।"
उन्होंने कहा, "हम इन सभी मांगों और सड़कों पर उतरे हर छात्र का पूरा समर्थन करते हैं।"
राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब एक दिन पहले वह, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके आवास के बाहर धरने पर बैठे थे और पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया था।
भाषा अमित रंजन
रंजन
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