दो-चार घूसों से कोई फर्क नहीं पड़ता, लोगों के लिए ऐसे और घूंसे खुशी के साथ सहने को तैयार हूं: राहुल
रंजन
- 22 Jul 2026, 09:29 PM
- Updated: 09:29 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को चुटीले अंदाज में कहा कि दो-चार घूंसों से कोई फर्क नहीं पड़ता और वह लोगों के लिए ऐसे और भी घूंसे खुशी के साथ सहने को तैयार हैं।
राहुल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात उस सवाल के जवाब में कही, जिसमें मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास के बाहर धरने के दौरान उन्हें जबरन हटाते समय कथित तौर पर 'घूंसा' मारे जाने का जिक्र किया गया था।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में छात्रों, किसानों और युवाओं सहित देश के लोगों की आवाज उठाना उनका दायित्व है।
उन्होंने कहा, ''सब ठीक था। मुझे घूंसे खाने की आदत है, इसमें कोई समस्या नहीं है। नेता प्रतिपक्ष के रूप में मेरा काम भारत के लोगों की इच्छा और आवाज को सामने रखना है, चाहे वह छात्रों की हो, किसानों की हो या युवाओं की।''
उन्होंने कहा, ''मुझसे अपेक्षा की जाती है कि मैं भारत के लोगों की आवाज का माध्यम बनूं। मुझसे यह भी अपेक्षा की जाती है कि जहां लोगों को पीड़ा हो रही हो, वहां देश का ध्यान आकर्षित करूं। इसके लिए चुकाई जाने वाली यह बहुत छोटी कीमत है, ये कोई बड़ी कीमत नहीं हैं।''
उन्होंने कहा, ''मेरे लिए यह बहुत बड़े सम्मान की बात है कि मैं अपने देश के लोगों की भावनाओं और इच्छाओं के साथ खड़ा रह सकूं। दो-चार घूंसों या ऐसे किसी व्यवहार से कोई फर्क नहीं पड़ता। लोगों के लिए मैं ऐसे और भी कई वार खुशी-खुशी सहने को तैयार हूं।''
प्रधानमंत्री के आवास के बाहर उनके धरने को समाप्त कराने के लिए पुलिस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह सही है कि पुलिसकर्मी उन्हें घसीटकर वहां से ले गए, लेकिन उसी दौरान उन्होंने उनके कान में फुसफुसाकर कहा, ''इस सरकार को हटाइए।''
राहुल गांधी ने उन्हें हटाने वाले पुलिसकर्मियों के हवाले से कहा, '' 'मैं राजस्थान का हूं, इन्हें (सरकार को) हटाइए... मैं हरियाणा का हूं, इन्हें हटाइए।'' उनके यह कहते ही वहां मौजूद लोग हंस पड़े।
उन्होंने कहा, ''यानी ऐसी भावना मौजूद है। हर कोई सच्चाई जानता है। समझदार पुलिसकर्मियों को भी लगता है कि देश के भविष्य के साथ अपराध हो रहा है।''
एक अन्य सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा, ''एक तरफ छात्रों का भविष्य है और वे चाहते हैं कि देश का ध्यान उनके मुद्दों पर केंद्रित रहे। दूसरी तरफ ध्यान भटकाने की कोशिश है। यानी एक ताकत मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि दूसरी ध्यान भटकाने में लगी है।''
उन्होंने कहा, ''मेरे साथ कैसा बर्ताव किया गया, यह मेरे लिए मायने नहीं रखता। मुझे इसकी परवाह नहीं है। मेरे साथ इससे पांच गुना बुरा बर्ताव किया जाए, तब भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। असल ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि छात्रों के साथ क्या हुआ, शिक्षा व्यवस्था कैसी है, पेपर लीक की समस्या और इन बच्चों को जो कीमत चुकानी पड़ी है, उस पर। इसलिए आप मेरे साथ जो चाहें करें - पांच गुना या दस गुना अधिक- मुझे कोई परवाह नहीं। बल्कि, मुझे यह अच्छा लगता है, क्योंकि मैं इससे सीखता हूं।''
नेता प्रतिपक्ष की यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई है, जब प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके आवास के बाहर धरना देने पर पुलिस ने उन्हें, प्रियंका गांधी वाद्रा और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव को जबरदस्ती वहां से हटा दिया था।
उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में अचानक हुए इस धरने से सरकार में हड़कंप मच गया। सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को विपक्षी नेताओं को उस संवेदनशील जगह से हटने के लिए मनाने को भेजा।
मंत्री के साथ गांधी की बातचीत कुछ मिनटों तक चली, जिसके बाद बातचीत बेनतीजा रहने पर सिंह और गृह सचिव वहां से चले गए।
सिंह के विरोध स्थल से जाने के कुछ ही देर बाद शाम को पुलिस ने गांधी और अन्य नेताओं को जबरदस्ती वहां से हटाया और हिरासत में ले लिया।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी को मॉडल टाउन के छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। प्रियंका गांधी और कुछ अन्य सांसदों को मंदिर मार्ग पुलिस थाने ले जाया गया, जहां कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी उनसे मिलने पहुंचीं।
रिहाई के बाद राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश में कहा कि जब यह साफ हो गया कि सरकार का छात्रों के मुद्दे पर बहस कराने का कोई इरादा नहीं है, तो उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने का फैसला किया।
भाषा संतोष रंजन
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