राजनाथ ने आईएएसवी त्रिवेणी अभियान की सराहना की, महिला दल को बताया भारत की बहादुर बेटियां
रंजन
- 22 Jul 2026, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पहली बार सेना के तीनों अंग की महिला अधिकारियों द्वारा पूरी की गई समुद्री परिक्रमा नौकायन अभियान की सफलता की बुधवार को सराहना की और अधिकारियों को लेकर गए आईएएसवी त्रिवेणी पोत को भारत की समुद्री कूटनीति का "नौकायन दूत" बताया।
थलसेना, नौसेना और वायुसेना की नौ महिला अधिकारियों ने 314 दिनों की इस समुद्री यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद मुंबई में वापसी की। इस दौरान उन्होंने चार महासागरों में करीब 25,500 समुद्री मील की दूरी तय की और 'ड्रेक पैसेज' सहित दुनिया के कुछ सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों को पार किया। इस अभियान में प्रकृति की कठिनतम चुनौतियों के बीच मानवीय दृढ़ता की परीक्षा हुई।
राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 'समुद्री प्रदक्षिणा' अभियान की वापसी समारोह को संबोधित किया।
भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में पहली बार थलसेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों ने 11 सितंबर 2025 को मुंबई के ऐतिहासिक गेटवे ऑफ इंडिया से भारतीय सेना नौकायन पोत (आईएएसवी) त्रिवेणी पर सवार होकर दुनिया की परिक्रमा का अभियान शुरू किया था।
सिंह ने कहा, "कुछ महीने पहले जब मैंने आईएएसवी त्रिवेणी को (डिजिटल तरीके से झंडा दिखाकर) रवाना किया था, तब मैंने दल से कहा था कि वे केवल समुद्री यात्रा पर नहीं जा रही हैं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास की यात्रा पर निकल रही हैं। सुरक्षित लौटकर आपने न केवल दुनिया की परिक्रमा पूरी की है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिलों को गर्व से भर दिया है।"
उन्होंने कहा कि यह केवल वापसी समारोह नहीं है, बल्कि भारत के संकल्प, भारतीय महिलाओं और तीनों सेनाओं की संयुक्त भावना की सफलता का उत्सव है। यह "नए भारत का उत्सव" भी है।
रक्षा मंत्री ने कहा, "कुछ यात्राएं केवल दूरी तय नहीं करतीं, बल्कि इतिहास रचती हैं। आईएएसवी त्रिवेणी की यात्रा ऐसी ही एक यात्रा है।"
उन्होंने कहा कि केप ऑफ गुड होप की विशाल लहरों, ड्रेक पैसेज की कठिन परिस्थितियों, समुद्र के बीच अकेलेपन, अनिश्चित मौसम और प्रकृति की चुनौतियों ने मानवीय क्षमता की परीक्षा ली।
सिंह ने बताया कि उन्हें जानकारी दी गई है कि खराब मौसम के कारण अभियान करीब 73 घंटे तक रुक गया था, लेकिन ''महिला अधिकारियों ने साबित किया कि तूफान से बड़ी ताकत मानवीय साहस की होती है।''
सिंह ने कहा, "समुद्र की लहरें ऊंची हो सकती हैं, लेकिन हमारी भारतीय बेटियों का संकल्प उनसे कहीं अधिक ऊंचा है। आपकी ताकत प्रशिक्षण, अनुशासन, टीम भावना और राष्ट्र के प्रति प्रेम में निहित थी।"
उन्होंने कहा कि इतिहास इसे केवल एक समुद्री अभियान के रूप में याद नहीं रखेगा, बल्कि उस दिन के रूप में याद करेगा जब थलसेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों ने एक ध्वज, एक संकल्प और एक लक्ष्य के साथ दुनिया को संदेश दिया कि भारत की ताकत उसकी एकता में है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया संयुक्त अभियानों, एकीकृत कमानों और बहु-क्षेत्रीय युद्ध की बात कर रही है, तब आईएएसवी त्रिवेणी ने "संयुक्तता की भावना को साकार किया है।"
उन्होंने कहा कि जहां एकीकरण होता है, वहां क्षमताएं कई गुना बढ़ जाती हैं और तीनों सेनाएं मिलकर आगे बढ़ने का मार्ग तैयार करती हैं।
सिंह ने कहा कि महिला अधिकारियों ने जिन देशों के बंदरगाहों का दौरा किया, वहां उन्होंने न केवल भारत का झंडा पहुंचाया, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी लोगों को परिचित कराया।
उन्होंने कहा, "इस दृष्टिकोण से आईएएसवी त्रिवेणी केवल एक समुद्री पोत नहीं, बल्कि भारत की समुद्री कूटनीति की नौकायन दूत बन गई।"
रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएएसवी त्रिवेणी आत्मनिर्भर भारत का जीवंत प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि देश में डिजाइन और निर्मित इस पोत ने भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और आत्मविश्वास को प्रदर्शित किया।
उन्होंने कहा कि त्रिवेणी द्वारा तय किए गए समुद्री मील भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों के समान हैं। सिंह ने कहा, "इतिहास समुद्रों का नहीं, बल्कि उन्हें पार करने वाले लोगों का लिखा जाता है। मैं भारत की बहादुर बेटियों का स्वागत करता हूं।"
उन्होंने कहा, ''आज भारतीय महिला केवल अवसर का इंतजार नहीं करती, बल्कि अवसरों का निर्माण करती है और नेतृत्व करती है। आईएएसवी त्रिवेणी में भारत की हर बेटी अपने भविष्य की झलक देख सकती है।''
कार्यक्रम में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ भी नयी दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए।
भाषा अमित रंजन
रंजन
2207 2013 दिल्ली