दिल्ली पुलिस ने संदिग्धों की पहचान के लिए एआई कैमरा नेटवर्क की मदद ली, 10 प्राथमिकी दर्ज
रंजन
- 22 Jul 2026, 07:43 PM
- Updated: 07:43 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में कथित तौर पर शामिल लोगों की पहचान करने के लिए अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कैमरों के नेटवर्क का उपयोग कर रही है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
जांचकर्ताओं का कहना है कि पुलिसकर्मियों पर हमला करने के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा।
पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि नयी दिल्ली जिले में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के व्यापक नेटवर्क से प्राप्त फुटेज का विश्लेषण करने के लिए एआई से लैस निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
सूत्र ने कहा, "ये एआई कैमरे उन लोगों की पहचान करने में पुलिस की मदद करेंगे जो पुलिस के साथ झड़प में शामिल थे, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा रहे थे और पुलिसकर्मियों पर हमला कर रहे थे। पुलिस डेटाबेस का उपयोग करके उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाएगी और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।"
सूत्र ने कहा कि जो लोग हिंसा में शामिल नहीं थे, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
जांच में मदद करने के लिए जनता से अपील करते हुए सूत्र ने कहा कि नागरिक हिंसा में शामिल लोगों के बारे में जानकारी साझा कर सकते हैं और उनकी पहचान कभी उजागर नहीं की जाएगी।
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "नयी दिल्ली में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। झड़पों में शामिल पाए जाने वाले हर व्यक्ति की पहचान की जाएगी, उनके आपराधिक रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।"
पुलिस ने बताया कि हिंसा के संबंध में अब तक 10 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं।
पुलिस द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, संसद मार्ग थाने में चार, कनाट प्लेस थाने में तीन और मंदिर मार्ग, बाराखम्बा तथा कर्तव्य पथ थाों में एक-एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इनमें से एक प्राथमिकी रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के एक कर्मी द्वारा दर्ज कराई गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर मारपीट की थी और इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया मंचों पर वायरल हो गया था।
पुलिस ने कहा कि जिन अपराधों की जांच की जा रही है उनमें दंगा करने, लोक सेवकों पर हमला करने, सरकारी काम में बाधा डालने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आपराधिक साजिश रचने, शस्त्र अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण (पीडीपीपी) अधिनियम और अन्य प्रासंगिक अपराधों के आरोप शामिल हैं।
पुलिस ने अब तक इन घटनाओं के सिलसिले में की गई गिरफ्तारियों की संख्या का खुलासा नहीं किया है।
पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अलावा, जांचकर्ता घटनाओं के क्रम को स्थापित करने के लिए सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और प्रदर्शन के दौरान तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा की गई रिकॉर्डिंग की भी जांच कर रहे हैं।
पुलिस ने जंतर-मंतर पर एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने, अफवाहों से बचने और सोशल मीडिया पर अपुष्ट जानकारी फैलाने से बचने की अपील की है।
पुलिस ने बार-बार लोगों से केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने और जांच के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सहयोग करने का आग्रह किया है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि जांच कई मोर्चों पर आगे बढ़ रही है और साक्ष्यों का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण किया जा रहा है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "जांच जारी है और डिजिटल तथा अन्य साक्ष्यों बारीकी से जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
पुलिस ने कहा कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और लोगों की पहचान की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि पुलिस जांच को मजबूत करने के लिए वीडियो क्लिप, चैट और तस्वीरों सहित डिजिटल साक्ष्यों का फोरेंसिक परीक्षण कर रही है।
झड़पें सोमवार को तब शुरू हुई जब कॉजपा के नेतृत्व में संसद की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे प्रदर्शनकारियों को सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया, जिससे संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास की सड़कों सहित कई स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड को कथित तौर पर तोड़ने की कोशिश की।
पुलिस ने बताया कि हिंसा में 60 से अधिक प्रदर्शनकारी और 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि हिंसा के दौरान पुलिस वाहनों सहित 15 से 20 से अधिक सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा है।
भाषा नोमान नोमान रंजन
रंजन
2207 1943 दिल्ली